आखिर ये राजनीतिक बवाल क्यों!

Feb 21 2016 05:42 PM
आखिर ये राजनीतिक बवाल क्यों!

इन दिनों देश में अराजकता का माहौल नज़र आ रहा है। कहीं किसी विश्वविद्यालय में नारेबाजी होती है और फिर सारे देश में माहौल बना दिया जाता है जैसे सारे देशभक्त एक ही दिन में पैदा हो गए हों। जिन्हें देशभक्ति के मायने भी मालूम नहीं हैं वे संतानों को नाजायज़ बताने लगते हैं। इस तरह की राजनीतिक छींटाकशी पहले कभी नहीं की गई मगर अब के दिनों में तो ऐसी राजनीति होने लगी है कि राजनेता एक दूसरे के डीएनए तक पहुंच रहे हैं। जैसे ये राजनीति छोड़कर किसी प्रयोगशाला में वैज्ञानिक का काम ही करने लगे हों। कभी असहिष्णुता की बात होती है तो कभी आरक्षण के जिन्न को रगड़ - रगड़ कर  घिसा जाता है जैसे वह अपने आका के लिए कोई बड़ा राजनीतिक बवाल लेकर आ जाएगा और इस जिन्न के धुऐं में असल मुद्दे धुंधले हो जाऐंगे।

जी हां, वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य बेहद नाटकीय नज़र आता है। असहिष्णुता होने के बाद भी लोग इसे धर्म और संप्रदाय भर के चश्मे से देखते हैं। एकाएक किसी और राज्य के गरीब निवासियों के हक का पानी मार दिया जाता है। जैसे मुनक नहर इन्होंने ही खड़े रहकर बनवाई हो और उसके पानी पर इनका ही अधिकार हो। हाल ही में जाट आरक्षण की आंधी चली तो सारा देश हिल गया। मगर अब यह बात सामने आ रही है कि जाट आरक्षण आंदोलन की आड़ में लोग लूटपाट ही मचाने लगे हैं। लोग अराजक हो गए हैं। आखिर यह सब क्यों हो रहा है। वे जाट जो सेना में अपनी भागीदारी कर देशप्रेम का पाठ लोगों को पढ़ाया करते थे वे जाट जो खेतों में मेहनत कर देश के उद्योग और आम आदमी के लिए उपयोगी फसल लहलहाया करते थे।

वे अब अशांति और क्रूरता का प्रतीक बनते जा रहे हैं। लगता है। गुजरात से चले पटले आरक्षण आंदोलन की चिंगारी हरियाणा में आकर गिर गई जिसके कारण जाटों ने अपना मोर्चा खोल दिया। जाट उग्र हो गए तो बड़े बेकाबू हो गए। अब इन्हें काबू में करने के लिए राजनीतिक प्रदर्शनों के माध्यम से मांगे की जा रही हैं तो दूसरी ओर दिल्ली में देशद्रोही नारेबाजी का मसला अभी भी बवाल मचा रहा है। देशप्रेमियों का खून खौल रहा है। उनके लिए खुद को सबसे बड़ा देशभक्त साबित करने का समय जो आ गया है।