आंध्र प्रदेश: EVM मामले में दखल देना चंद्रबाबू नायडू को पड़ा महंगा

आंध्र प्रदेश: EVM मामले में दखल देना चंद्रबाबू नायडू को पड़ा महंगा

विशाखापत्तनम: निर्वाचन आयोग ने तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) को पत्र भेजकर पूछा है कि शनिवार को चुनाव आयुक्त से मिलने आए पार्टी अध्यक्ष एन चन्द्रबाबू के प्रतिनिधिमंडल में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले शख्स को कैसे शामिल किया गया था. निर्वाचन आयोग ने अपने पत्र में कहा है कि जब नायडू मिलने के लिए आए तो उनके साथ हरि प्रसाद नामक एक शख्स भी था, जिन्होंने कई दफा ईवीएम के कामकाज के बारे में विभिन्न तकनीकी मसलों को उठाया और दावा किया कि उन्हें इस क्षेत्र में तकनीकी विशेषज्ञता प्राप्त है.

पत्र में बताया गया है कि बैठक के दौरान फैसला किया गया कि निर्वाचन आयोग की तकनीकी टीम प्रसाद को इस संबंध में विस्तृत जानकारी देगी. पत्र में कहा गया है कि बाद में पता चला हरिप्रसाद 2010 में ईवीएम की कथित चोरी के एक आपराधिक मामले में संलिप्त था, जिसमें उसके खिलाफ एक FIR दर्ज की गई थी. तेदेपा के कानूनी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष को संबोधित करते हुए निर्वाचन आयोग की तरफ से लिखे गए इस पत्र में कहा गया, "यह पूरी तरह से हैरान करने वाली बात है कि किस तरह ऐसी पृष्ठभूमि वाले तथाकथित तकनीकी विशेषज्ञ को आंध्र प्रदेश के सियाम और तेदेपा प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिनिमंडल में शामिल कैसे होने दिया गया."

उल्लेखनीय है कि शनिवार को आंध्र प्रदेश के सीएम नायडू ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा से मिल कर एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि गुरुवार को सूबे में वोटिंग के दौरान बड़ी संख्या में ईवीएम में खराबी पाई गई थी और सुरक्षा के अभाव में हिंसक घटनाएं भी देखी गई थी.

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