राष्ट्रपति को विश्व भारती के कुलपति सुशांत दत्तागुप्ता ने भेजा इस्तीफा

नई दिल्ली : प्रशासनिक एवं वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों के चलते विश्व भारती के कुलपति सुशांत दत्तागुप्ता ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को E-Mail के जरिए अपना इस्तीफा भेजा है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सूत्रों से मालूम हुआ कि उन्हें राष्ट्रपति सचिवालय से इस्तीफा पत्र प्राप्त हुआ है लेकिन उन्होंने कुलपति से इस्तीफे का लिखित पत्र मांगने पर बल दिया क्योंकि E-Mail से पत्राचार मान्य नहीं है।

इससे पहले मंत्रालय ने कुलपति को दिए गए कारण बताओ नोटिस पर उनके जवाब से ‘असंतुष्ट’ रहने के बाद पिछले हफ्ते राष्ट्रपति से 68 वर्षीय दत्तागुप्ता को हटाने की सिफारिश की थी। हालांकि राष्ट्रपति ने विगत 23 सितंबर को मंत्रालय को फाइल लौटाते हुए दत्तागुप्ता को बख्रास्त करने की सिफारिश की थी और मंत्रालय से कोई भी फैसला लेने से पहले कानूनी सलाह लेने को कहा था। मंत्रालय ने कथित रूप से दत्तागुप्ता को वित्तीय एवं प्रशासनिक गड़बड़ियों का आरोपी पाने के बाद उनकी फाइल राष्ट्रपति के पास भेजी थी। दत्तागुप्ता के खिलाफ लगे आरोपों में एक साथ विश्व भारती से वेतन और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से पेंशन लेने का आरोप शामिल हैं जो कि कानून का कथित उल्लंघन है।

कानून के तहत दत्तागुप्ता को विश्व भारती से मिलने वाले वेतन से अपने पेंशन की राशि कटवानी चाहिए थी। इसके अलावा कुलपति पर अधिकार ना होने के बावजूद अनियमित नियुक्तियां करने का भी आरोप है जिनमें परीक्षा नियंत्रक की नियुक्ति शामिल है। उन्होंने विश्व भारती अधिनियम का उल्लंघन करते हुए महत्वपूर्ण पदों को मंजूरी दी थी। हालांकि विश्वविद्यालय संबंधी वर्तमान कानूनों में कुलपति को बर्खास्त करने का प्रावधान नहीं है, उन्हें हटाने के लिए राष्ट्रपति सामान्य नियम अधिनियम, 1987 की धारा 16 लागू कर सकते हैं।

अधिनियम नियुक्ति करने वाले प्राधिकरण को किसी केंद्रीय अधिनियम या नियम के तहत नियुक्त किसी भी व्यक्ति को निलंबित या बर्खास्त करने का अधिकार देता है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा गठित एक तीन सदस्यीय समिति ने इस साल फरवरी में दत्तागुप्ता को कथित रूप से दोषी पाया था। समिति का नेतृत्व इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) एस एस यादव ने किया था। पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सदस्य प्रदीप भट्टाचार्य ने जून में राष्ट्रपति से मिलकर कुलपति को हटाने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि दत्तागुप्ता के नेतृत्व में विश्वविद्यालय अपना ‘गौरव खो रहा है।

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