चमकते दिये

Oct 03 2015 03:08 PM
चमकते दिये

जो जले थे हमारे लिए.

बुझ गए आज वह सारे दिए.

कुछ अँधेरे की थी साजिशे.

कुछ उजालो के धोखे थे.

आपने जैसा चाहा वैसा.

ढल गए हम.

संभलकर बहुत चले.

पर फिसल गए हम .

किसी ने तोडा दिल .

तो किसी ने विश्वाश.

और लोग कहते रहे.

बदल गए हम.