मोदी सरकार 2.0 का पहला बजट, क्या इन चुनौतियों से निपट पाएंगी वित्त मंत्री ?

Jul 04 2019 10:47 AM
मोदी सरकार 2.0 का पहला बजट, क्या इन चुनौतियों से निपट पाएंगी वित्त मंत्री ?

नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शुक्रवार को मोदी सरकार 2.0 का प्रथम बजट पेश करेंगी। देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री ऐसे वक़्त में बजट पेश करने जा रही हैं, जब कम विकास दर, रोजगार में शिथिलता, बचत और उपभोग में गिरावट, मॉनसून की सुस्त शुरुआत, वैश्विक सुस्ती और ट्रेड वॉर के कारण चुनौतियां बहुत बढ़ चुकी हैं। क्या वह भारत के ग्रोथ इंजन को दोबारा गति दे पाएंगी? बजट की बड़ी संभावनाओं डालिए एक नजर... 

1. विकास दर 
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ग्रोथ को रफ़्तार देने के लिए कुछ बड़े कदम उठा सकती हैं। विकास दर 5 वर्ष के सबसे निम्न स्तर पर आ चुका है। वित्त वर्ष 2015 में 7.5 प्रतिशत की रफ्तार से अर्थव्यवस्था आगे बढ़ी, जबकि वित्त वर्ष 2018-19 में 6.8 प्रतिशत रही। 

2. बचत में गिरावट रोककर बढ़ोत्तरी के उपाय
बचत में लगातार गिरावट आ रही है। सरकार को गिरावट रोकने और बचत में बढ़ोत्तरी के उपायों को पर ध्यान देना होगा। परिवारों को और ज्यादा बचत करने के लिए टैक्स प्रोत्साहन का ऐलान किया जा सकता है। वित्त वर्ष 2014 में जीडीपी का 32.1 प्रतिशत हिस्सा बचत खाते में था तो वित्त वर्ष 2018 में यह 30.5 प्रतिशत रहा। 

3. राजकोषीय रोडमैप में संशोधन
प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए राजकोषीय रोडमैप में संशोधन किया जा सकता है। वित्त वर्ष 2020 के लिए अंतरिम बजट में राजकोषीय घाटे का टारगेट जीडीपी का 3.4 प्रतिशत निर्धारित किया गया था, जबकि वित्त वर्ष 17 और 18 में यह 3.5 प्रतिशत था। 

4. टैक्स में कटौती से उपभोग को प्रोत्साहन
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण उपभोग को प्रोत्साहन देने के लिए टैक्स में कमी का ऐलान कर सकती हैं। इसके तहत सभी करदाताओं के लिए छूट की सीमा को 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये की जा सकती है। इसके अलावा सभी कंपनियों के लिए यूनिफॉर्म कॉर्पोरेट टैक्स 25 प्रतिशत करने का ऐलान हो सकता है। 

5. ग्रामीण भारत के लिए पैकेज
सीतारमण ग्रामीण इलाकों में खर्च को बढ़ावा देने के लिए कुछ उपायों का ऐलान कर सकती हैं। किसानों के लिए ब्याज दरों में कमी की जा सकती है, तो वहीं खाद के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर का उपयोग हो सकता है। अंतरिम बजट में केंद्र सरकार ने मनरेगा के लिए 60 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया था, यह वित्त वर्ष 17 में 38,500 करोड़ रुपये रहा था। 

6. विनिवेश में वृद्धि
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण विनिवेश के रास्ते पर तेज रफ़्तार से आगे बढ़ सकती हैं। वित्त वर्ष 17 में 46,246 करोड़ रुपये के विनिवेश का ऐलान किया गया था, जबकि वित्त वर्ष 18 में 1,00,000 करोड़ रुपये विनिवेश का ऐलान किया गया था। अंतरिम बजट 2020 में 90,000 करोड़ रुपये का टारगेट रखा गया था। 

7. नए टैक्सों की घोषणा
सरकार राजस्व बढ़ाने हेतु कुछ नए करों की घोषणा भी कर सकती है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स में बढ़ोत्तरी की जा सकती है तो सरकार उत्तराधिकार कर यानी कि इनहेरिटेंस टैक्स को वापस शुरू कर सकती है। बैकिंग ट्रांजैक्शन टैक्स से राजस्व में वृद्धि की जा सकती है। इसके अलावा ज्यादा आमदनी पर सरचार्ज भी लगाया जा सकता है। 

8. रोजगार में वृद्धि के लिए श्रम सुधार
रोजगार में वृद्धि के लिए काफी समय से लंबित श्रम सुधारों को बढ़ावा दिया जा सकता है। इसके तहत नियोक्ताओं को नौकरी देने और हटाने को लेकर नियमों में लचीलापन लाया जा सकता है। नियुक्तियों पर ज्यादा प्रोत्साहन और सरकारी नौकरी में वृद्धि जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। स्टार्टअप्स के लिए भी प्रोत्साहन का ऐलान भी किया जा सकता है। 

9. जल संकट के लिए पैकेज
देश में जल संकट लगातार गहराता जा रहा है। इस बार केंद्र सरकार ने इसके लिए पृथक मंत्रालय 'जल शक्ति' का गठन किया है। इस बजट में सरकार जल के लिए अलग से कोष बनाएगी। इसके तहत एक बड़ी राशि का आवंटन किया जा सकता है। 2001 में प्रति व्यक्ति 1,816 क्यूबिक मीटर पानी उपलब्धता थी जो 2025 में 1,340 और 2050 तक 1,140 क्यूबिक मीटर रह जाने की आशंका जताई जा रही है। 

10. इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जोर
इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में खर्च को बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए कुछ बड़े प्रॉजेक्ट्स का ऐलान हो सकता है। फंड जुटाने के लिए बॉन्ड लाया जा सकता है। 

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