आज है नवरात्र का पांचवा दिन, जरूर पढ़े माँ स्कंदमाता की यह पावन कथा

चैत्र नवरात्रि का आरम्भ 13 अप्रैल से हो चुका है और आज पांचवा दिन है। पांचवे दिन माँ स्कंदमाता का पूजन किया जाता है। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं माँ स्कंदमाता की कथा।

माँ स्कंदमाता की कथा- सेनापति कुमार कार्तिकेय की माता स्कंदमाता है। कुमार कार्तिकेय को ग्रंथों में सनत-कुमार, स्कंद कुमार के नाम से पुकारा गया है। कहा जाता है माता स्कंदमाता पूर्णत: ममता लुटाती हैं। माता का पांचवां रूप शुभ्र अर्थात श्वेत है। कथा के अनुसार जब अत्याचारी दानवों का अत्याचार बढ़ता है तब माता संत जनों की रक्षा के लिए सिंह पर सवार होकर दुष्टों का अंत करती हैं। देवी स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं, माता अपने दो हाथों में कमल का फूल धारण करती हैं और एक भुजा में भगवान स्कंद या कुमार कार्तिकेय को सहारा देकर अपनी गोद में लिए बैठी हैं। मां का चौथा हाथ भक्तो को आशीर्वाद देने की मुद्रा मे है।

आपको हम यह भी बता दें कि देवी स्कंद माता ही हिमालय की पुत्री पार्वती हैं इन्हें ही माहेश्वरी और गौरी के नाम से जाना जाता है। यह पर्वत राज की पुत्री होने से पार्वती कहलाती हैं, महादेव की वामिनी यानी पत्नी होने से माहेश्वरी कहलाती हैं और अपने गौर वर्ण के कारण देवी गौरी के नाम से पूजी जाती हैं। स्कंदमाता माता को अपने पुत्र से अधिक प्रेम है इसलिए मां को उनके पुत्र के नाम के साथ संबोधित किया जाना पसंद है। कहा जाता है जो भक्त माता के इस स्वरूप की पूजा करते है मां उस पर अपने पुत्र के समान स्नेह लुटाती हैं।

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