एनईईटी हो, लेकिन अगले वर्ष सेः वैंकेया नायडू

नई दिल्ली : देश में मेडिकल के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा के संयुक्त रुप से आयोजित करने पर केंद्र सरकार का कहना है कि वो इसके लिए तैयार है, लेकिन अगले साल से। सरकार इस बारे में छात्रों को होने वाली परेशानियों से सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराएगी। लोकसभा में शून्यकाल के दौरान विभिन्न दल के सदस्यों ने इस बारे में अपनी चिंता जाहिर की।

संसदीय कार्य मंत्री वैंकेया नायडू ने कहा कि मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं यह सरकार का फैसला नहीं है बल्कि उच्चतम न्यायलय का निर्णय है। हम भी साझा प्रवेश परीक्षा के पक्ष में है, लेकिन अगले वर्ष से। तृणमूल कांग्रेस की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने इस विषय को उठाते हुए कहा कि कोर्ट के इस आदेश के कारण लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है, क्योंकि इन छात्रों ने दो-तीन वर्षो से तैयारी की थी और अब अचानक उनसे परीक्षा के ठीक पहले साझा प्रवेश परीक्षा देने को कहा जा रहा है।

पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में काफी संख्या में छात्रों ने स्थानीय भाषाओं में तैयारी की थी लेकिन अब उनसे अंग्रेजी में परीक्षा देने को कहा जा रहा है। उन्होने कहा कि यदि इसे इस वर्ष से लागू करना है, तो इसके लिए चरणबद्ध तरीका अपनाया जाए। यही छात्रों के लिए बेहतर होगा।

इस पर नायडू ने कहा कि साझा परीक्षा के मामले में दो बाते सामने आई है, एक वर्ग साझा परीक्षा के पक्ष में है और कुछ निजी कॉलेज अपने स्तर पर परीक्षा आयोजित करते आए है। जिसमें कई तरह की अनियमितताओं की बात सामने आई है।

नायडू ने कहा कि सरकार का विचार है कि साझा प्रवेश परीक्षा हो, लेकिन हम एकाएक इस में स्विच नहीं कर सकते। सीबीएसई में इंग्लिश में पढ़ाई होती है, जब कि अन्य बोर्ड में स्थानीय भाषा में पढ़ाई होती है। 18 प्रतिशत छात्र ही अंग्रेजी में शिक्षा पाते है जब कि शेष अपनी मातृभाषा में।

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