इन सरकारों को गर्भपात संबंधी कानून को लेकर कोर्ट ने भेजा नोटिस

Aug 08 2020 02:40 PM
इन सरकारों को गर्भपात संबंधी कानून को लेकर कोर्ट ने भेजा नोटिस

अगर किसी महिला के गर्भ का गर्भ किसी भयानक बीमारी या विकृति का शिकार है. नियम के मुताबिक गर्भ 20 हफ्ते का होने के पश्चात गर्भपात के लिए हाईकोर्ट से अनुमति लेनी पड़ती है. ऐसे ही एक केस में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गर्भपात के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए केंद्र, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ को समन जारी कर उन्हें पक्ष रखने के​ निर्देश दिए हैं.

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बता दे कि जस्टिस राजबीर सहरावत ने बताया कि एक्ट के तहत अगर किसी गर्भवती महिला का भ्रूण किसी घातक बीमारी या विकृति​ मिली है, तो बीस हफ्ते के भ्रूण का मेडिकल बोर्ड की अनुमति से गर्भपात किया जा सकता है. कोर्ट ने बताया कि ऐसे कई मामले में उच्च न्यायलय 20 सप्ताह से ज्यादा उम्र के भ्रूण के गर्भपात की अनुमति देता रहा है.

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इसके लाभ कुछ शिक्षित और संपन्न लोगों को प्राप्त होता है. वह समय पर गर्भपात करवा मां की जान को बचा पाते हैं. किन्तु आम और गरीब लोगों का क्या, जिन्हे कोई कानूनी मदद मिल ही नहीं पाती है. ऐसे में न केवल माता की जान को खतरा होता है बल्कि अपंग और असहाय बच्चा भी जन्म ले लेता है. वही, न्यायालय ने कहा कि 20 सप्ताह तक गर्भपात का प्रावधान है, लेकिन अगर गर्भ में पल रहे भ्रूण का दोष 20 सप्ताह के बाद पता चले तो क्या किया जाए. ऐसे में इस प्रावधान पर कई प्रश्न खड़े होते हैं. कोर्ट ने बताया कि इससे पहले कि इस प्रावधान पर गौर किया जाए, अच्छे होगा कि इस केस में केंद्र सहित पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ से इस पर मदद लिया जाए.

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