ग्लोबल वार्मिंग के Cause and Effect के बारे जानना होगा बेहद जरूरी

Jun 01 2016 08:10 PM
ग्लोबल वार्मिंग के Cause and Effect के बारे जानना होगा बेहद जरूरी

वर्तमान में मानवीय गतिविधियों के कारण उत्पन्न ग्रीनहाउस गैसों के प्रभावस्वरूप पृथ्वी के दीर्घकालिक औसत तापमान में हुई वृद्धि को वैश्विक तापन/ग्लोबल वार्मिंग कहा जाता है | ग्रीनहाउस गैसें पृथ्वी से बाहर जाने वाले ताप अर्थात दीर्घतरंगीय विकिरण को अवशोषित कर पृथ्वी के तापमान को बढ़ा देती हैं, इस प्रक्रिया को ‘ग्रीनहाउस प्रभाव’ कहते हैं | ग्रीन हाउस गैसों में मुख्यतः कार्बन डाई ऑक्साइड, मीथेन, ओज़ोन आदि गैसें शामिल हैं |

1880 से 2012 की अवधि के दौरान पृथ्वी के औसत सतही तापमान में 0.85°C  की वृद्धि दर्ज की गयी है| 1906 से 2005 की अवधि के दौरान पृथ्वी के औसत सतही तापमान में 0.74±0.18°C की वृद्धि दर्ज की गयी है |

वैश्विक तापन के कारण

वैश्विक तापन का प्रमुख कारण मानवीय गतिविधियों के कारण वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा में वृद्धि होना है.ग्रीनहाउस गैसों में मुख्य रूप से कार्बन डाई ऑक्साइड(CO2),मीथेन(CH4),नाइट्रस ऑक्साइड(N2O), ओज़ोन (O3), क्लोरोफ़्लोरो कार्बन (CFCs) आदि गैसें शामिल हैं | किसी भी ग्रीनहाउस गैस का प्रभाव वातावरण में उसकी मात्रा में हुई वृद्धि, वातावरण में उसके रहने की अवधि और उसके द्वारा अवशोषित विकिरण के तरंगदैर्ध्य (Wavelength of Radiation) पर निर्भर करता है | ग्रीनहाउस गैसों में कार्बन डाई ऑक्साइड(CO2) वातावरण में सर्वाधिक मात्रा में उपस्थित है| ग्रीनहाउस गैसों उत्सर्जन मुख्यतः जीवाश्म ईंधनों के दहन, उद्योगों, मोटर वाहनों, धान के खेतों, पशुओं की चराई, रेफ्रीजरेटर, एयर-कंडीशनर  आदि से होता है|

हालाँकि वायुमंडल में सर्वाधिक मात्रा में पायी जाने वाली गैसें नाइट्रोजन, ऑक्सीज़न और ऑर्गन हैं, लेकिन ये ग्रीनहाउस गैसें नहीं हैं क्योंकि इनके अणु में एक ही तत्व के दो परमाणु शामिल हैं, जैसे-नाइट्रोजन (N2) ऑक्सीज़न (O2) या फिर एक ही तत्व का परमाणु इनके अणु में पाया जाता है ,जैसे- ऑर्गन (Ar) | जब ये वाइब्रेट (Vibrate ) होते हैं तो इनके इलैक्ट्रिक चार्ज के वितरण में कोई परिवर्तन नहीं आता है, अतः ये अवरक्त विकिरण (Infrared Radiation) से लगभग अप्रभावित रहते हैं |

जिन गैसों के अणुओं में अलग अलग तत्वों के दो परमाणु पाये जाते हैं, जैसे- कार्बन मोनो ऑक्साइड (CO) या हाइड्रोजन क्लोराइड (HCl)  वे अवरक्त विकिरण को अवशोषित तो करते हैं लेकिन अपनी विलेयता (Solubility) और अभिक्रियाशीलता (Reactivity ) के कारण वातावरण में बहुत कम समय तक ही रहते हैं |अतः ये भी ग्रीनहाउस प्रभाव में कोई महत्वपूर्ण योगदान नहीं देते हैं, इसीलिए ग्रीनहाउस गैसों की चर्चा करते वक्त इन्हें छोड़ दिया जाता है|

वर्तमान में मानवीय गतिविधियों के कारण उत्पन्न ग्रीनहाउस गैसों के प्रभावस्वरूप पृथ्वी के दीर्घकालिक औसत तापमान में हुई वृद्धि को वैश्विक तापन/ग्लोबल वार्मिंग कहा जाता है | ग्रीनहाउस गैसें पृथ्वी से बाहर जाने वाले ताप अर्थात दीर्घतरंगीय विकिरण को अवशोषित कर पृथ्वी के तापमान को बढ़ा देती हैं, इस प्रक्रिया को ‘ग्रीनहाउस प्रभाव’ कहते हैं | ग्रीन हाउस गैसों में मुख्यतः कार्बन डाई ऑक्साइड, मीथेन, ओज़ोन आदि गैसें शामिल हैं |

1880 से 2012 की अवधि के दौरान पृथ्वी के औसत सतही तापमान में 0.85°C  की वृद्धि दर्ज की गयी है |1906 से 2005 की अवधि के दौरान पृथ्वी के औसत सतही तापमान में 0.74±0.18°C की वृद्धि दर्ज की गयी है|