अगर आपके हाथ भी अक्सर सुन्न पड़ जाते है तो सावधान हो जाईये, हो सकती है गंभीर बीमारी

Aug 24 2018 03:50 PM
अगर आपके हाथ भी अक्सर सुन्न पड़ जाते है तो सावधान हो जाईये, हो सकती है गंभीर बीमारी

क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आपके हाथ या पैर अचानक सुन्न पड़ गए हो। और अगर आपके साथ ऐसा अक्सर होते रहता है तो सावधान हो जाये क्योंकि यह एक गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। दरअसल शरीर के हिस्सों का बार-बार सुन्न पड़ना  कार्पल टनल सिंड्रोम नामक गंभीर बीमारी का प्रारम्भ हो सकता है। 

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क्या होता है कार्पल टनल सिंड्रोम 

कार्पल टनल सिंड्रोम एक गंभीर बीमारी है जिसके तहत हाथों और कलाई में भयंकर दर्द उत्पन्न होता है। दरअसल कार्पल टनल हड्डियों और कलाई की अन्य कोशिकाओं द्वारा बनाई गई एक संकरी नली होती है। जो हमारे हाथो से होकर गुजरने वाली नर्व सेल्स की सुरक्षा करती है। यह नर्व  हमारे अंगूठे और अंगुलियों से जुड़ी होती है। 

क्यों होती है सुन्नता 
कार्पल टनल के जरिये गुजरने वाली नर्व सेल्स हमारे हाथों में होने वाले किसी अहसास को हमारे दिमाग तक पहुँचती है जिससे हम उसे महसूस कर पाते है। लेकिन कार्पल टनल सिंड्रोम बीमारी में टनल की अंदरूनी कोशिकाओं में सूजन आ जाती है जिससे नर्व सेल्स पर दबाव पड़ता है और हमें हाथों में सुन्नता महसूस होने लगती है। 

महिलाओं को है ज्यादा खतरा 

डॉक्टर्स के मुताबिक कार्पल टनल सिंड्रोम का खतरा पुरुषो के मुकाबले महिलाओं को ज्यादा होता है। जैसे-जैसे यह बीमारी बढ़ती जाती है वैसे वैसे ही हाथो में सुन्नता भी बढ़ती जाती है और अगर सही समय पर इलाज नहीं कराया गया तो हाथो में कुछ  महसूस न होने की समस्या भी हो सकती है। 

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किस वजह से होता है कार्पल टनल सिंड्रोम 
 
डॉक्टर्स का कहना है कि लगातार एक ही हाथ से काम करने से कार्पल टनल सिंड्रोम की दिक्कत हो सकती है। इसका खतरा उन लोगों को ज्यादा होता है  जिनके पेशे में कलाई मोड़ने या ज्यादा हाथ पाव हिलने की जरूरत नहीं होती है। लम्बे समय तक कंप्यूटर या डेस्क पर बैठे रहने वाले लोगों में भी कार्पल टनल सिंड्रोम का खतरा होता है। 

क्या है समाधान 

डॉक्टर्स के मुताबिक इस बीमारी से बचने के लिए लगातार दो घंटे से ज्यादा कंप्यूटर के सामने या डेस्क पर नहीं बैठना चाहिए। डॉक्टर्स यह भी कहते है कि हर  घंटे कंप्यूटर के सामने से ब्रेक लेना चाहिए। इसके अलावा दिन में दो से तीन बार कलाइयों को गोल-गोल घूमने से भी इस बीमारी की आशंका कम की जा सकती है। 

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