Skoda की इस सी​रीज की ‘फर्जी’ कार डीलर ने ग्राहक को थमाई

Skoda की इस सी​रीज की ‘फर्जी’ कार डीलर ने ग्राहक को थमाई

किसी डरवाने सपने से कम सुहास मंजूनाथ के लिए कार खरीदने का अनुभव नहीं रहा. डीलर अपनी इनवेंट्री फटाफट निकलाने के लिए किस-किस तरह की तिकड़म लगाते हैं, इसका अंदाजा शायद आपको नहीं है. लेकिन मंजूनाथ ने हार नहीं मानी और लंबी ल़ड़ाई के बाद उन्होंने अपनी जिद पूरी की, जिसके आगे कंपनी को भी झुकना पड़ा. आइए जानते हैं क्या है सुहास मंजूनाथ से जुड़ा मामला

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मंजूनाथ जो बंगलुरू मे निवास करते है 2016 में नई स्कोडा रैपिड खरीदने का मन बनाया और उन्हें स्कोडा रैपिड का खास लिमिटेड एडिशन ब्लैक पैकेज खरीदना था. वे डीलरशिप के पास गए और इसके बारे में पूछताछ की. सुहास स्कोडा की बिल्ड क्वॉलिटी और उसकी कम कीमत से बेहद प्रभावित थे. पहली डीलरशिप ने कार नहीं होने का हवाला दिया, जिसके बाद उन्होंने दूसरी डीलरशिप का रुख किया. लेकिन सुहास कार के ब्लैक पैकेज होने की बात पर संतुष्ट नहीं थे, क्योंकि डॉक्यूमेंट्स पर कहीं भी ब्लैक पैकेज होने की बात नहीं थी. इस बीच कार के हेडलैंप फ्लैश और बीम ने काम करना बंद कर दिया, उन्होंने इसकी शिकायत डीलरशिप से की. डीलर ने टैक्स इनवॉइस में संशोधन करके उस पर ब्लैक पैकेज लिख कर भेज दिया और कार सर्विस सेंटर पर वही इनवॉइस दिखाने को कहा.

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कार टेक्निशियंस को 27 दिसंबर को सुहास शोरूम पर दिखाने गए थे. सर्विस सेंटर ने कार ठीक करने के लिए 8-10 दिन की मोहलत मांगी. सर्विस सेंटर पर उन्हें दिखाया गया कि कैसे रेगुलर स्कोडा रैपिड के हेडलैंप कार में ठीक से काम कर रहे हैं, लेकिन ‘ब्लैक पैकेज’ के साथ आने वाले प्रोजेक्टर हेडलैंप्स काम नहीं कर रहे हैं. सुहास को महसूस हुआ कि डीलर ने कार के कुछ पार्ट्स को बदल दिया है, जो केवल लिमिटेड एडिशन में आते थे. डीलर ने सुहास को बताया कि उसने उसने उनकी कार के लिए खास हेडलैंप्स का ऑर्डर दिया है, लेकिन कार रेगुलर वर्जन की है और लिमिटेड एडिशन नहीं है सुहास को माइ स्कोडा मोबाइल एप पर पता चला.

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कंज्यूमर कोर्ट में सुहास ने केस फाइल किया और ड़ीलर की चिटिंग के बारे में जानकारी दी, जिसके बाद इस साल लंबी लड़ाई के बाद स्कोडा और सुहास में सैटलमेंट हुआ और उन्हें नई कार दी. सुहास ने इस दौरान कई दिक्कतों का सामना किया, यहां तक कि स्कोडा ने भी कहा कि उन्होंने सुहास को नई कार की डिलीवरी की है. सुहास को दूसरी कारें भी ऑफर की गईं, लेकिन सुहास ने लेने से मना कर दिया. कंज्यूमर कोर्ट ने सुहास को नई कार देने का आदेश दिया और जिसके बाद उन्हें नई कार की डिलीवरी मार्च के आखिर में कंपनी ने दी.

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