क्या निर्जला एकादशी से कर सकते हैं एकादशी व्रत की शुरुआत? यहाँ जानिए

क्या निर्जला एकादशी से कर सकते हैं एकादशी व्रत की शुरुआत? यहाँ जानिए
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सनातन धर्म में एकादशी तिथि का खास महत्व है। हर महीने दो एकादशी व्रत आते हैं, एक शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष में। कहते हैं कि इस व्रत में व्रती अन्न व जल ग्रहण नहीं करते हैं। एकादशी व्रत प्रभु श्री विष्णु को समर्पित है, इसलिए इस दिन श्रीहरि की पूजा-अर्चना करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से मनुष्य सभी पापों से मुक्ति पा जाते हैं तथा सभी सुखों को भोगकर अंत में मोक्ष को जाते हैं। इस वर्ष निर्जला एकादशी 18 जून 2024 को है। इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जानते हैं। आइये आपको बताते है निर्जला एकादशी व्रत से जुड़ी जरुरी बातें...

एकादशी व्रत कब से प्रारंभ करना चाहिए?
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, एकादशी व्रत की शुरुआत मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी से करनी चाहिए। इस एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस दिन ही प्रभु श्री विष्णु ने माता एकादशी से आशीर्वाद प्राप्त किया था तथा माता ने उनके इस व्रत को पूजनीय बताया था। हालांकि इसके अतिरिक्त एकादशी व्रत चैत्र, बैसाख एवं माघ महीने में भी प्रारंभ किया जा सकता है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि गुरु तारा व शुक्र तारा उदय का व्रत प्रारंभ करते समय ध्यान रखना चाहिए।

निर्जला एकादशी तिथि कब से कब तक- 
एकादशी तिथि 17 जून को सुबह 04 बजकर 43 मिनट पर प्रारंभ होगी तथा एकादशी तिथि का समापन 18 जून 2024 को सुबह 06 बजकर 24 मिनट पर होगा।

निर्जला एकादशी व्रत पारण का समय- 
निर्जला एकादशी व्रत का पारण 19 जून 2024 को किया जाएगा। व्रत पारण का समय प्रातः 05 बजकर 23 मिनट से सुबह 07 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। पारण के दिन द्वादशी तिथि समाप्त होने का समय प्रातः 07 बजकर 28 मिनट है।

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