फर्जी बिल और गलत पता बताकर सरकार को लगाया करोड़ों का चूना

नई दिल्ली : मप्र के 7 फर्जी कारोबारियों के कारनामों को कैग (भारत के महालेखा परीक्षक) सबसे के सामने लाया है. मामले के अनुसार इन सभी ने अपने आप को कपड़ा उद्योग से जुड़ा कारोबारी बताकर अपने उद्योग को अपग्रेड करने के नाम पर केंद्र को 20 करोड़ रुपए से ज्यादा की चपत लगाई है. इन सभी लोगों ने मशीनों के फर्जी बिल और गलत पते देकर यह राशि गप कर ली. फर्जी तरीके से सरकारी पैसे हड़पने के इस मामले का खुलासा शुक्रवार को CAG द्वारा वस्त्र मंत्रालय को लेकर संसद में पेश की गई अपनी रिपोर्ट में किया.

इसमें बताया गया कि वर्ष 2007 से 2014 के बीच वस्त्र मंत्रालय ने कपडा उद्योग के आधुनिकीकरण के लिए प्रौद्योगिकी उन्नायन निधि योजना(टफ्स)के तहत करीब 18580 करोड़ रुपए खर्च किए थे. इसी दौरान कई फर्जी कारोबारियों ने यह पैसा हड़प लिया. इनमें मप्र के भी 7 कारोबारी शामिल हैं. जिन्होंने केंद्र को 20 करोड़ रुपए से ज्यादा का चूना लगाया.

रिपोर्ट के अनुसार मप्र के अलावा गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु में भी गड़बडी पकडी गई है, लेकिन सबसे ज्यादा गड़बड़ी मप्र में पकड़ी गई .कैग ने वस्त्र मंत्रालय के पैसों को गलत तरीके से हड़पने के जो मामले पकड़े,उनमें करीब 46 करोड़ की गड़बड़ी पाई है.

कैसे सामने आया फर्जीबाड़ा ?

योजना के तहत मप्र सहित देश भर के करीब 22998 लोगों को योजना के तहत पैसा दिया गया था. कैग ने मप्र सहित 6 राज्यों के 3231 लाभार्थियों की औचक जांच की. इसमें पाया कि 2007 से 2014 के बीच 129 ऐसे कारोबारी मिले,जिन्होंने पैसा तो लिया, पर न मशीने खरीदी और न ही कारखाना शुरू किया.

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