मोदी सरकार ने गहरे समुद्र में संसाधनों को लेकर लिया ये बड़ा फैसला

Jun 16 2021 05:29 PM
मोदी सरकार ने गहरे समुद्र में संसाधनों को लेकर लिया ये बड़ा फैसला

पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने गहरे समुद्र में संसाधनों का पता लगाने तथा महासागरीय संसाधनों के सतत इस्तेमाल के लिए गहरे समुद्र प्रौद्योगिकियों को विकसित करने के लक्ष्य से गहरे समुद्र अभियान पर पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) के प्रस्ताव को अनुमति दे दी है। इस अभियान को चरणबद्ध ढंग से लागू करने के लिए 5 साल की अवधि की अनुमानित लागत 4,077 करोड़ रुपये होगी। 3 सालों (2021-2024) के लिए प्रथम चरण की अनुमानित लागत 2823।4 करोड़ रुपये होगी। गहरे समुद्र परियोजना भारत सरकार की नील अर्थव्यवस्था पहल का समर्थन करने के लिए एक मिशन आधारित परियोजना होगी। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओइएस) इस बहु-संस्थागत महत्वाकांक्षी अभियान को लागू करने वाला नोडल मंत्रालय होगा।

गहरे समुद्र में खनन तथा मानवयुक्त पनडुब्बी के लिए प्रौद्योगिकियों का विकास: तीन व्यक्तियों को समुद्र में 6,000 मीटर की गहराई तक ले जाने के लिए वैज्ञानिक सेंसर तथा उपकरणों के साथ एक मानवयुक्त पनडुब्बी विकसित की जाएगी। काफी कम देशों ने यह क्षमता प्राप्त की है। मध्य हिंद महासागर में 6,000 मीटर गहराई से पॉलीमेटेलिक नोड्यूल्स के खनन के लिए एक एकीकृत खनन प्रणाली भी विकसित की जाएगी। भविष्य में संयुक्त राष्ट्र के संगठन इंटरनेशनल सीबेड अथॉरिटी के द्वारा वाणिज्यिक खनन कोड रेडी किए जाने के हालात में, खनिजों के अन्वेषण अध्ययन से निकट भविष्य में वाणिज्यिक दोहन का रास्ता प्रशस्त होगा। यह घटक नील अर्थव्यवस्था के प्राथमिकता वाले इलाकों गहरे समुद्र में खनिजों तथा ऊर्जा की खोज तथा दोहन में सहायता करेगा।

महासागर जलवायु परिवर्तन सलाहकार सेवाओं का विकास: अवधारणा घटक के इस तथ्य के तहत मौसम से लेकर दशकीय वक़्त के आधार पर अहम जलवायु परिवर्तनों के भविष्यगत अनुमानों को समझने तथा उसी के अनुरूप मदद प्रदान करने वाले अवलोकनों और मॉडलों के एक समूह का विकास किया जाएगा। यह घटक के नील अर्थव्यवस्था के प्राथमिकता वाले इलाके तटीय पर्यटन में सहायता करेगा। 

गहरे समुद्र में जैव विविधता की खोज तथा संरक्षण के लिए तकनीकी नवाचार: सूक्ष्म जीवों समेत गहरे समुद्र की वनस्पतियों तथा जीवों की जैव-पूर्वेक्षण और गहरे समुद्र में जैव-संसाधनों के सतत इस्तेमाल पर अध्ययन इसका मुख्य केन्द्र होगा। यह घटक नील अर्थव्यवस्था के प्राथमिकता वाले क्षेत्र समुद्री मात्स्यिकी तथा संबद्ध सेवाओं को सहायता प्रदान करेगा।

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