बजट 2018: वित्त मंत्री ने ऑटो इंडस्ट्री पर नहीं दिखाई दया

बजट 2018: वित्त मंत्री ने ऑटो इंडस्ट्री पर नहीं दिखाई दया

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा गुरूवार को पेश किये गए यूनियन बजट 2018 में कई क्षेत्रों से जुडी घोषणाएं की गई. इसी क्रम में भारत के ऑटो सेक्टर से जुडी भी कई घोषणाएं की गई हालांकि इस बजट से इंडियन ऑटो सेक्टर को ज्यादा लाभ मिलता नहीं दिख रहा है. आज हम आपको इस बजट में ऑटो सेक्टर से जुडी घोषणाओं के बारे में बताने जा रहे है. साथ ऑटो इंड्रस्टी को इस बजट से क्या उम्मीद थी इस बारे में भी चर्चा करेंगे. सबसे पहले आपको बताते है इस बजट में ऑटो सेक्टर के हाथ क्या लगा.

  • बजट 2018 में किसानों पर पूरा ध्यान दिया गया है.किसानों के लिए 500 करोड़ रुपये का ऑपरेशन ग्रीन और रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 2000 करोड़ रुपये की घोषणा की गई है. वहीं खरीफ के MSP में 150% की बढ़ोतरी से भी ऑटो सेक्टर को थोड़ा लाभ होने की उम्मीद है. इससे टू व्हीलर्स, ट्रैक्टर्स, एंट्री लेवल कार्स और लाइट कमर्शियल व्हीकल्स को बढ़ावा मिलेगा.
  • इंफ्रास्ट्रक्चर पर 20% की वृद्धि और भारत माला के तहत करीब 35,000 किलोमीटर सड़कों का निर्माण भी कमर्शियल वाहनों के लिए सकारात्मक कदम समझा जा सकता है.
  • ग्रामीण इलाकों में बिजली सुधार के लिए 16,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. सरकार ने 250 करोड़ रुपये के अधिक के राजस्व वाली कंपनियों के लिए 25% टैक्स बढ़ा दिया गया है. इससे पहले 50 करोड़ राजस्व वाली कंपनियों को भी 25% टैक्स देना पड़ता था.
  • सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए ऑटो कम्पोनेंट्स पर कस्टम ड्यूटी बढ़ने का फैसला किया है. इसके बाद कंपनियां भारत में ही अपने वाहनों को बनाने पर जोर देंगी.
  • बजट में सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर किसी तरह की कोई बड़ी घोषणा नहीं की गई. साथ ही इनके पार्ट्स को लेकर कम GST की तलाश भी पूरी नहीं हो सकी.
  • सरकार ने बैटरी मैन्युफैक्चरिंग या चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रदान करने के लिए कोई घोषणा नहीं की है.

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