यहाँ जानिए बुद्ध पूर्णिमा की तिथि, शुभ मुहूर्त और मान्यताएं

हिन्दी पंचांग के अनुसार गुरुवार, 7 मई को वैशाख मास की अंतिम तिथि पूर्णिमा है. जी हाँ और इसके बाद 8 मई से ज्येष्ठ मास शुरू हो जाएगा. जी दरअसल इस तिथि पर भगवान बुद्ध की जयंती भी मनाई जाती है. ऐसे में पूर्णिमा तिथि पर विशेष पूजा-पाठ अन्य धार्मिक कर्म करने की परंपरा है. तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं बुद्ध पूर्णिमा की तिथि और शुभ मुहूर्त, इसी के साथ इससे जुडी मान्यताएं.

बुद्ध पूर्णिमा की तिथि और शुभ मुहूर्त - 
बुद्ध पूर्णिमा की तिथि: 7 मई 2020
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 6 मई 2020 को शाम 7 बजकर 44 मिनट से 
पूर्णिमा तिथि समाप्‍त: 7 मई 2020 को शाम 04 बजकर 14 मिनट तक 

बुद्ध पूर्णिमा का महत्‍व - आप सभी को बता दें कि हिन्‍दू धर्म में बुद्ध पूर्णिमा का विशेष महत्‍व है. जी दरअसल वैशाख महीने की पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध का जन्‍म हुआ था. कहा जाता है महात्‍मा बुद्ध को सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्‍णु का नौवां अवतार माना जाता है. इसी के साथ ही इस पूर्णिमा को सिद्ध विनायक पूर्णिमा या सत्‍य विनायक पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. आप सभी को बता दें कि वैशाख पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध को बोधगया में पीपल के पेड़ के नीचे बुद्धत्‍व की प्राप्‍ति हुई थी और यही नहीं पूर्णिमा के दिन ही बुद्ध ने गोरखपुर से 50 किलोमीटर दूर स्थित कुशीनगर में महानिर्वाण की ओर प्रस्‍थान किया था. जी दरअसल हिन्‍दुओं के अलावा बौद्ध धर्म के लोग इस दिन को बुद्ध जयंती के रूप में मनाते हैं.  

बुद्ध पूर्णिमा से जुड़ी मान्यताएं - 

- ऐसी मान्यता है कि वैशाख की पूर्णिमा को ही भगवान विष्णु ने अपने नौवें अवतार के रूप में जन्म लिया. 
- ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण के बचपन के दोस्त सुदामा वैशाख पूर्णिमा के दिन ही उनसे मिलने पहुंचे थे. इस बीच जब दोनों दोस्त साथ बैठे तब कृष्ण ने सुदामा को सत्यविनायक व्रत का विधान बताया था. वहीं सुदामा ने इस व्रत को विधिवत किया और उनकी गरीबी नष्ट हो गई. 
- मान्यता है कि इस दिन धर्मराज की पूजा भी की जाती है क्योंकि सत्यविनायक व्रत से धर्मराज खुश होते हैं. ऐसा माना जाता है कि धर्मराज मृत्यु के देवता हैं इसलिए उनके प्रसन्‍न होने से अकाल मौत का डर कम हो जाता है. 

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