PM के RSS की ओर झुकाव पर ब्रिटेन के संगठनों ने की टिप्पणी

लंदन : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ब्रिटेन के कुछ महिला संगठनों और महिला शिक्षाविदों द्वारा पत्र लिखकर लिंग आधारित हिंसा में बढ़ोतरी किए जाने की बात कही है। इस दौरान ब्रिटेन की इन संस्थाओं ने इस बात पर चिंता जताई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मसले पर मौन क्यों हैं। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी ब्रिटेन दौरे पर रवाना होने के अवसर पर उनसे इस तरह की मांग की जा सकती है। यही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आरएसएस की ओर झुकाव को लेकर ब्रिटेन के लोग परेशान हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को इटली के फासीवाद और जर्मनी की नाजी पार्टियों के माॅडल पर आधारित अर्धसैन्य संगठन कहा है।

यह भी कहा है कि संघ की विदेश शाखा की फिलहाल ईसाईयों और मुस्लिमों के विरूद्ध उपेक्षा के कारण ब्रिटिश चैरिटी कमीशन जांच की जा रही है। पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कुछ सवाल भी किए गए हैं। जिसमें कहा गया है कि घृणा और अपराधों को मुख्यतौर पर आरएसएस और इससे जुड़े संगठनों द्वारा की जाने वाली हिंसा और स्त्री द्वेष को स्वीकार किया जाता है। यही नहीं यह भी कहा जाता है कि इस तरह के संगठनों की ब्रिटेन में जमकर निंदा की गई।

दूसरी ओर यह भी कहा गया कि निश्चित तौर पर इस तरह के संगठन कहीं भी नहीं हैं, इससे लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश के प्रधानमंत्री को निर्देशित किया जाना चाहिए। नारीवादियों द्वारा कहा गया कि वे विद्वेषपूर्ण गतिविधि के लिए भी बेहद जिम्मेदार हैं। इसके चलते दंपतियों पर जमकर प्रहार किए गए।

इस तरह के पत्र में कहा गया कि वर्ष 2002 के गुजरात दंगों समेत महिलाओं के विरूद्ध हिंसा करने को लेकर कई तरह की बात का उल्लेख किया गया है। इस मामले में यह बात भी सामने आई है कि आशा प्रोजेक्ट - लंदन इला पटेल, अपना हक के निदेशक जका अहमद, आशियाना नेटवर्क - लंदन के निदेशक शमिंदर उभी, निदेशक एशियन वूमेंस एसोसिएशन आॅफ वूमेन के सरबजीत गंगेर और अन्य लोगों ने भी हस्ताक्षर किए हैं। 

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