एनएसजी में सदस्यता को लेकर भारत को मिला ब्रिटेन का साथ

नई दिल्ली : न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप की सदस्यता के मामले में भारत के लिए ब्रिटेन से अच्छी खबर आई है। एनएसजी में भारत की सदस्यता को लेकर अब ब्रिटेन भी समर्थन देने को राजी हो गया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरुन ने अपने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की।

15 दिनों के भीतर भारत को चौथे देश का समर्थन मिल गया है। अमेरिका ने पहले ही सभी 43 सदस्य देशों को एनएसजी की सदस्यता के लिए सपोर्ट करने को कहा है। गुरुवार को मोदी और कैमरुन के बीच हुई बातचीत में दोनों इस बात पर राजी हुए कि इस दावे की कामयाबी के लिए भारत को लगातार परमाणु हथियारों में कमी करने के लिए कोशिशें करनी होंगी।

दोनों ने भारत और ब्रिटेन के संबंधों को लेकर भी बात की। भारत को एनएसजी के लिए न्यूजीलैंड, स्विटजरलैंड, यूएस और अब ब्रिटेन का साथ मिला है। अमेरिका के विदेश विभाग के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा कि मैं 2015 में अमेरिकी राष्ट्रपति के भारत दौरे के दौरान कही बातों को दोहराते हुए कहना चाहूंगा कि भारत मिसाइल मियंत्रण प्रणाली के सभी नियमों को पूरा करता है, इसलिए व एनएसजी का सदस्य बनने के लिए पूरी तरह योग्य है।

भारत की अर्जी पर उतर कोरिया की राजधानी सियोल में विचार किया जाएगा। इस माह के अंत में सियोल में होने वाले एनएसजी के पूर्ण अधिवेशन में इस पर विचार किया जाएगा। सियोल में 24 जून को एनएसजी का पूर्ण अधिवेशन होने वाला है। भारत को जापान से भी समर्थन मिलने की उम्मीद है।

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