ध्यान मंत्र, स्तोत्र और कवच से करें माँ ब्रह्मचारिणी को खुश

Oct 17 2020 08:00 PM
ध्यान मंत्र, स्तोत्र और कवच से करें माँ ब्रह्मचारिणी को खुश

18 अक्टूबर को नवरात्रि का दूसरा दिन है जो ब्रह्मचारिणी माता को समर्पित होता है। कहा जाता है मां दुर्गा की नवशक्ति का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। ऐसे में ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है और मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। कहा जाता है ब्रह्मचारिणी की उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम बढ़ता है। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं ब्रह्मचारिणी स्त्रोत और माँ ब्रह्मचारिणी के मंत्र। इन सभी का जाप आप नवरात्र के दूसरे दिन कर सकते हैं क्योंकि इससे आपको बड़े लाभ हो सकते हैं।

श्लोक - दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु| देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ||

ध्यान मंत्र-  वन्दे वांच छि लाभायचन्द्रर्घकृतशेखराम्।

जपमालाकमण्डलुधराब्रह्मचारिणी शुभाम्घ्

गौरवर्णास्वाधिष्ठानास्थितांद्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।

धवल परिधानांब्रह्मरूपांपुष्पालंकारभूषिताम्घ्

पद्मवंदनापल्लवाराधराकातंकपोलांपीन पयोधराम्।

कमनीयांलावण्यांस्मेरमुखीनिम्न नाभि नितम्बनीम्घ्

ब्रह्मचारिणी स्तोत्र -

तपश्चारिणीत्वंहितापत्रयनिवारिणीम्।

ब्रह्मरूपधराब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्घ्

नवचक्त्रभेदनी त्वंहिनवऐश्वर्यप्रदायनीम्।

धनदासुखदा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्घ्

शंकरप्रियात्वंहिभुक्ति-मुक्ति दायिनी।

शान्तिदामानदा,ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्।

ब्रह्मचारिणी कवच-

त्रिपुरा में हृदयेपातुललाटेपातुशंकरभामिनी।

अर्पणासदापातुनेत्रोअर्धरोचकपोलोघ्

पंचदशीकण्ठेपातुमध्यदेशेपातुमहेश्वरीघ्

षोडशीसदापातुनाभोगृहोचपादयो।

मंत्र - 
1। या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

2। दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।

कहा जाता है नवरात्र के दूसरे दिन इन सभी का पाठ करने से सभी कष्टों का अपने आप ही निवारण हो जाता है और जीवन सुखद हो जाता है।

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