पांडव और कौरव में से कौन बनेगा हस्तिनापुर का युवराज

बी आर चोपड़ा की महाभारत हर किसी को अपनी तरफ आकर्षित कर रही है. जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ रही है, लोगों का जुड़ाव भी मजबूत होता जा रहा है. मंगलवार के एपिसोड में पांडवों और कौरव के बीच मतभेद भी देखने को मिले और श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी के दर्शन भी हुए.सभी राजकुमारों ने अपने-अपने शस्त्र के जरिए अपनी निपुणता दिखाई. एक तरफ राजकुमार युधिष्टर का शत्र भाला है जिसका उन्होंने बखूबी अंदाज में इस्तेमाल किया और विजय भी प्राप्त की. वहीं दुर्योधन और भीम गदा से लड़ते हैं. वहीं उस गदे के जरिेए भीम और दुर्योधन एक दूसरे से टकराते हैं और एक कांटे का मुकाबला देखने को मिलता है. परन्तु जिस मुकाबले का हर कोई लुत्फ उठा रहा होता है, अचानक ही वो हिंसक रूप ले लेता है और एक युद्ध में तब्दील हो जाता है. ये देख दोनों के युद्ध को वही रोक दिया जाता है.इसके बाद अर्जुन अपने धनुष के जरिए सभी को अपनी कला से परिचित करवाते हैं. वो एक बाण के जरिए सबसे पहले भीष्म, धृतराष्ट्र, कृपाचार्य और द्रोणाचार्य को प्रणाम करते हैं. उसके बाद दूसरे बाण से अर्जुन तेज आंधी तूफान ले आते हैं. फिर तीसने बाण से वो अग्नि प्रजुलित कर देते हैं. 

इसके साथ ही चौथे बाण से वो बिजलियां कड़का देते हैं. पांचवे बाण से वर्षा का भी अनुभव करवा देते हैं. आखिर में छठे बाण के जरिए अर्जुन पर्वत उखाड़कर सीधा रंगभूमि में ले आते हैं. ये देख हर कोई हैरान रह जाता है और उनके गुरु द्रोणाचार्य उनकी सभी के सामने खूब तारीफ करते हैं.बीच प्रतियोगिता में कर्ण अर्जुन को युद्ध की चुनौती दे देते हैं. वो अर्जुन से धनुष के जरिए युद्ध करने की बात कहते हैं. लेकिन ये युद्ध हो पाता इससे पहले कृपाचार्य कर्ण से उनका परियर मांग लेते हैं. अब कण तो अपना परिचय देने में असमर्थ साबित होते हैं लेकिन कुंती अपने पहले पुत्र को देख पहचान जाती हैं. कर्ण ने जो कवच और कुण्डल पहन रखा है उसे देख कुंती को इस बात का अहसास हो जाता है परन्तु वो शांत रहती हैं. लेकिन बाद में दुर्योंधन बीच में दखल देता है और कर्ण को अपना मित्र बताता है. वो कहता है- अंग देश का राज्य मेरे अधिकार में है कुलगुरु, और मैं आज अपने मित्र कर्ण को अंग देश का राजा बनाता हूँ. दुर्योधन इतना बोल सभी के सामने कर्ण का राज्याभिषेक कर देता है. लेकिन तभी वहां कर्ण के पिता सारथी अधिरध पहुंच जाते हैं. 

आपकी जानकारी के लिए बता दें की उन्हें देख भीम कर्ण का मजाक बनाता है और उसे सूत पुत्र बता देता है. इससे क्रोधित दुर्योधन ने पांडवो को ललकार परन्तु तभी सूर्यास्त हो गया और भीष्म ने शंख बजा आयोजन को खत्म कर दिया.इसके बाद दिखया जाता है कि एक बार कैसे राजा द्रुपद ने द्रोणाचार्य का अपमान कर दिया था. जब कृपाचार्य ने द्रोणाचार्य से वापस उनकी पत्नी कृपी के पास जाने को कहा तब द्रोणाचार्य ने बताया कि वो ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि उन्होंने एक वचन अभी तक पूरा नहीं किया है. वो बताते हैं कि उन्होंने अपनी पत्नी को वादा किया था कि वो एक गाय लेकर आएंगे. परन्तु उस मुश्किल समय में द्रुपद द्रोणाचार्य की कोई सहायता नहीं कि और उन्हें खूब अपमानित किया. ये बात द्रोणाचार्य को काफी अखरती है. लेकिन अब जब कौरवों और पांडवो की शिक्षा पूरी हो गई है ऐसे में द्रोणाचार्य अपने शिष्यों से गुरुदक्षिणा में राजा द्रुपद को बंदी बनाने की मांग करते हैं.

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