आज कल कि राजनीति पर बॉलीवुड के शॉट गन का बयान

Jan 26 2016 08:30 AM
आज कल कि राजनीति पर बॉलीवुड के शॉट गन का बयान

जयपुर : कभी अपनी आवाज से सबको अपना दिवाना बनाने वाले सिने जगत के शॉटगन कहें जाने वाले शत्रुघन सिन्हा इस समय थोड़े परेशान हैं। जिसकी वजह सिने जगत या उनकी पर्सनल ज़िंदगी नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक ज़िंदगी हैं। जिससे परेशान होकर उन्होंने एक समय पर राजनीति छोड़ने तक का मन बना लिया था।

जयपुर में हुये साहित्य महोत्सव में शत्रुघन ने अपनी किताब 'एनीथिंग बट खामोश' के साथ शिरकत की। जिसमें उन्होंने बताया कि वो किस तरह से आज कल कि राजनीति से परेशान हो चुकें हैं। शॉटगन ने कहां कि अब राजनीति में अच्छे लोग बचें ही नही हैं। क्यूंकी अब राजनीति का माहोल बहुत ही गंदा हो चुका हैं। जो अच्छे लोगों के लिये नहीं हैं। यदि राजनीति को साफ़ सुथरा बनाना हैं तो इसमें साफ लोगों का आना बहुत ही जरूरी हैं। 

आगें उन्होने बताया कि मैंने तो राजनीति छोड़ने का मन ही बना लिया था। क्यूंकी बात मेरे मान सम्मान कि हैं।क्यूंकी कुछ लोंगों ने राजनीति में मेरी छवि खराब करने कि कोशिश कि हैं।जिससे मैं  बहुत ही हताश हो चूँका था। तभी ऐसे मुश्किल समय पर मेरा साथ दिया मेरें गुरु आडवाणी जी ने, उन्होंने मुझें समझाया कि ये परीक्षा का समय हैं।

और जिसने ये सब सह लिया वही एक दिन समाज और खुद कि नजर में एक अच्छा नेता साबित होता हैं। शॉटगन ने आगें बताया कि एक लंबे संघर्ष के बाद ही एक अच्छा दौर आता हैं। उन्होंने बताया कि राजनीति में आपको हर जगह हर कोई नीचे गिराने के लिये हर वक़्त तैयार बैठा हैं। पर यदि में हर किसी का जवाब देता रहूँगा तो एक दिन मेरे दोस्तों से ज्यादा दुश्मन होंगे। इसलिए मैंने आडवाणी जी कि बात को प्राथमिकता देना जरूरी समझा। और ये निर्णय लिया कि अपना काम खमोंशी और ईमानदारी से करूंगा। क्यूंकी यदि में सहीं रहूँगा तो मेरा भगवान और आप लोंगों का प्यार भी हमेंशा मेरें साथ रहेंगा।

उन्होंने आगे कहां कि में अपने बच्चों को भी एक साफ नजरिया बनायें रखने कि सलाह देंता हूँ। क्यूंकी जब आपके देखनें का नजरिया सहीं होता हैं। तो आपके काम खुद -ब- खुद सही होनें लगतें हैं। जिससे आपका आत्मविश्वास बढ़ता हैं। जो आज के दौर के लिये बहुत जरूरी हैं।   

मैं युवाओ से यहीं कहना चाहूँगा कि वो राजनीति में आयें और राजनीति को एक नयी दिशा प्रदान करें। उन्होंने अपनी किताब से जुड़ी हुईं बातें महोत्सव में कि। किन्तु ज़्यादातर समय वो राजनीति पर ही बोलते रहें।