क्या कैप्टन हो सकते है भारत के नए उपराष्ट्रपति!

चंडीगढ़: कैप्टन अमरिंदर सिंह की पार्टी ‘पंजाब लोक कांग्रेस’ का शीघ्र ही भारतीय जनता पार्टी में विलय हो सकता है। दोनों दलों के बीच इस पर सैद्धांतिक मंजूरी बन गई है। अगले कुछ दिनों में इस पर आखिरी फैसला किया जा सकता है। इससे बीजेपी को पंजाब में अपना आधार बढ़ाने में कुछ सहायता प्राप्त हो सकती है, तो इसके बदले में कैप्टन अमरिंदर सिंह को क्या मिल सकता है, इस पर अटकलें जारी हैं। बताया जा रहा है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को उपराष्ट्रपति का प्रत्याशी बनाकर बीजेपी सिख समुदाय में एक बेहतर संदेश देने का प्रयास कर सकती है। बीजेपी की इस योजना को कांग्रेस को एक और झटका देने का प्रयास के तौर पर भी देखा जा रहा है।   

दरअसल, कैप्टन अमरिंदर सिंह इस वक़्त स्पाइन की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उनका लंदन में ऑपरेशन हुआ है तथा इस वक़्त वह आराम कर रहे हैं। उनका परिवार भी इस वक़्त उनके साथ है। इस बीमारी से उबरने में उन्हें कुछ वक़्त लग सकता है। स्वास्थ्य कारणों से कैप्टन लंबे वक़्त से अपनी पार्टी को वक़्त नहीं दे पा रहे हैं। बीते विधानसभा चुनाव में भी वे पार्टी को बहुत सही तरीके से संचालित नहीं कर पाए तथा लंबे समय तक सीएम रह चुके कैप्टन अपनी पार्टी को पंजाब में एक मजबूत हालात में लाने में असफल रहे। पार्टी ने NDA के गठबंधन में पंजाब की 28 सीटों पर चुनाव लड़ा, किन्तु किसी एक सीट पर भी उसके प्रत्याशी जीतने में नाकाम रहे। अधिकतर प्रत्याशियों की जमानत भी जब्त हो गई।

उपराष्ट्रपति बनाने की चर्चा:-
चर्चा है कि बीजेपी कैप्टन अमरिंदर सिंह को उपराष्ट्रपति प्रत्याशी बना सकती है। इससे बीजेपी सिख समुदाय में एक सकारात्मक संदेश देने का प्रयास कर सकती है, जिसका फायदा उसे पंजाब विधानसभा के अगले चुनावों के चलते हो सकता है। वहीं, इससे वह कांग्रेस को एक मनोवैज्ञानिक झटका देने में भी कामयाब साबित हो सकती है। गांधी परिवार के बेहद नजदीकी रहे व्यक्ति के उच्च सदन में सभापति होने से उसे निरंतर असहज हालात में रखा जा सकता है। किसान आंदोलन के वक़्त से ही बीजेपी स्वयं को सिख समुदाय का करीबी बताने का प्रयास करती रही है। इसके लिए कभी पीएम नरेंद्र मोदी गुरुद्वारा रकाबगंज जाते हुए देखे गए, तो कभी पंजाब में पगडी पहने देखे गए। सिख गुरु के अवतरण दिवस पर कृषि कानूनों की वापसी को भी उनकी इसी प्रयास के तौर पर देखा गया था। बताया जा रहा है कि इसी प्रयास में बीजेपी सिख समुदाय के किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति को उपराष्ट्रपति पद पर बिठा सकती है। हालांकि, इस दौड़ में कैप्टन अमरिंदर सिंह स्वास्थ्य कारणों से पीछे हैं, जबकि मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह पुरी अधिक आगे माने जा रहे हैं।   

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