राम मंदिर नहीं, विकास के मुद्दे पर BJP यूपी में चुनाव लड़ेगी

राम मंदिर नहीं, विकास के मुद्दे पर BJP यूपी में चुनाव लड़ेगी

नई दिल्ली : 2017 में उतर प्रदेश में होने वाले चुनाव में अब तक कहा जा रहा था कि बीजेपी के लिए राम मंदिर एक बड़ा मुद्दा होगा। इस पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने पार्टी का पक्ष साफ करते हुए कहा कि पार्टी विकास के मुद्दे पर यूपी में चुनाव लड़ेगी, ने कि राम मंदिर के मुद्दे पर, क्यों कि राम मंदिर का मसला एक सांस्कृतिक मुद्दा है।

शुक्रवार को उन्होने कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है और हम सब फैसले का इंतजार कर रहे है। एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में राजनाथ सिंह ने कहा कि बीजेपी देश के सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य का चुनाव विकास के एजेंडे पर लड़ेगी।

जब उनसे पूछा गया कि क्या ध्रुवीकरण का फायदा बीजेपी को होगा तो उन्होंने कहा कि हम कभी ध्रुवीकरण में शामिल नहीं रहे। न अभी शामिल हैं और न कभी शामिल रहेंगे क्योंकि मैं मानता हूं कि ध्रुवीकरण देश के लिए खतरनाक हो सकता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में बीजेपी की जीत का विश्वास व्यक्त किया।

विपक्ष पर बांटो और राज करो की नीति का आरोप लगाते हुए सिंह ने कहा कि हमारे पीएम ने पीएम बनने से पहले ही नारा दिया था कि सबका साथ, सबका विकास। विपक्ष पर परोक्ष रुप से हमला करते हुए सिंह ने कहा कि जो सत्तारूढ़ बीजेपी को बदनाम करते हुए सरकार बनाने के लिए बांटो और राज करो की नीति पर चलते हैं।

उन्होंने कहा कि राजग शासन में उचित पूछताछ और पर्याप्त सबूतों के आधार पर ही कार्रवाई की जाती है। कश्मीरी पंडितों के मामले में बोलते हुए सिंह ने कहा कि उनके गृह राज्य में समग्र बस्तियां बसाए जाने के पक्षकर है। उन्होने बताया कि पूर्व सीएम मुफ्ती साहब के राज में हमने इस बात पर चर्चा की थी।

उन्होने कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए जमीन देने का भरोसा भी दिया था। अब हमने महबूबा मुफ्ती से इस बारे में चर्चा की है। वह भी समग्र बस्तियों के प्रस्ताव पर राजी हुई हैं। उन्होंने कहा कि वह भी चाहती है कि कश्मीरी पंडित लौटे और समग्र बस्तियों में कोई दिक्कत नहीं है।

यदि पंडितों के साथ कुछ सिख और मुसलमान रहते हैं तो उसमें क्या दिक्कत है। राज्य सरकार ने कश्मीरी पंडितों के लिए तीन जगहों की पहचान करने की सूचना दी है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार ने अभी पूरा ब्योरा नहीं दिया है। नरेंद्र मोदी सरकार ने कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास को अपने एजेंडे में शीर्ष पर रखा है और उसने अपने पहले बजट में ही इसके लिए 500 करोड़ रूपए मंजूर किए हैं।