लोकसभा चुनाव: क्या ममता के गढ़ में चलेगा भाजपा का जादू, जानिए क्या कहता है इतिहास ?

लोकसभा चुनाव: क्या ममता के गढ़ में चलेगा भाजपा का जादू, जानिए क्या कहता है इतिहास ?

कोलकाता: इस लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए कितना अहम् हो चुका है, इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि कूच बिहार में की गई पीएम मोदी रैली, प्रदेश में गत दो माह में चौथी रैली थी। इस प्रदेश की राजनीति जहां आम तौर पर कांग्रेस, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। कम्युनिस्ट पार्टी के पास पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा समय तक सत्ता में रहने का रिकॉर्ड है।

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ऐसे में जिस प्रदेश ने कभी भाजपा को मुख्य पार्टी नहीं माना, इस बार उम्मीद से भाजपा की ओर देख रहा है? 2014 में भाजपा ने हिंदी हार्टलैंड माने जाने वाले यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार और दिल्ली की 226 लोकसभा सीटों में से 196 सीटों पर शानदार जीत हासिल की थी। इसके बाद 2018 में पार्टी को राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनावों में शिकस्त झेलनी पड़ी थी। ऐसे में भाजपा ऐसे राज्यों की ओर अधिक उम्मीद से देख रही है। 

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पश्चिम बंगाल लोकसभा सांसदों की दृष्टि से देश का तीसरा सबसे बड़ा सूबा है। इस सूची में सबसे ऊपर 80 सीटों के साथ उत्तर प्रदेश और इसके बाद 48 सीटों के साथ महाराष्ट्र का नंबर आता है। बंगाल में भाजपा गत 20 वर्षों में 2 सीटों से ऊपर नहीं उठ पाई है। 1999 में पार्टी ने दो सीटें जीती, 2004 में एक भी नहीं, 2009 में एक और 2014 में फिर से दो सीटें जीती। जिस चीज ने भाजपा को कुछ राहत दी है, वह यह कि यहां 2009 के मुकाबले 2014 में पार्टी का वोट शेयर तीन गुना बढ़ा है। इस मामले में भाजपा बंगाल में तीसरे स्थान पर है, जबकि कांग्रेस चौथे स्थान पर। 

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