कांग्रेस मुक्त भारत के फेर में कहीं अराजक न हो जाए भाजपा

रॉबर्ट वाड्रा को लेकर कई बार सवाल उठते रहे हैं। जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार अस्तित्व में आई तब से वाड्रा के मामले में कुछ न कुछ बयानबाजी की जाती रही। यही नहीं रॉबर्ट वाड्रा का संबंध हथियारों के एक विवादित सौदेबाज को लेकर बताया जा रहा है। वाड्रा हरियाणा के डीएलएफ लैंड डील मामले में भी सुर्खियों में रहे हैं मगर इस पूरे मसले पर सोनिया गांधी का बयान जिस तरह से आया है उसे लेकर चर्चा हो रही है। उन्होंने इस मामले में जरूरत से ज़्यादा राजनीति होने की बात कही है। हालांकि केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार पर लगाम कसने की बात कही है।

मगर जिस तरह से कांग्रेस का विरोध किया जा रहा है उससे राजनीतिक वैमनस्य निकालने की बात कही जा रही है। भाजपा कांग्रेस मुक्त भारत के माध्यम से विपक्षी दलों को समाप्त या फिर अपेक्षाकृत कम ताकतवार बनाने का प्रयास करने में लगी है। ऐसे में संभावना है कि कहीं भाजपा शासन अराजक न हो जाए। जब सरकार अपने दूसरे ही वर्ष में प्रगति का ढोल पीटने लगे, विकास की बातें करने लगे जबकि असल में महंगाई का ग्राफ और बढ़ने वाला हो, कई प्रोजेक्ट्स पांच वर्ष के कार्यकाल के बाद पूर्ण होने वाले हों तो भी उनका श्रेय लिया जा रहा है। ऐसे में जब विपक्ष बिल्कुल कमजोर हो जाएगा तो सरकार के अराजक होने का डर भी संभावित है

हालांकि कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में कम भ्रष्टाचार नहीं किया है। इस दौरान उन्होंने कोल ब्लॉक आवंटन घोटाला, 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले किए। हालांकि कांग्रेस का यूपीए - 2 का कार्यकाल निराशाजनक रहा लेकिन यह भी ठीक नहीं है कि भ्रष्टाचार के नाम पर कांग्रेस को समाप्त ही कर दिया जाए और फिर विपक्ष की अहमियत पूरी तरह से नगण्य कर दी जाए। सत्ताधारी दल भाजपा की यही आकांक्षा लगती है। ऐसे में आने वाले समय में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार के तानाशाह होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है।

'लव गडकरी'

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