निकाय चुनाव को लेकर भाजपा-शिवसेना आमने-सामने

मुंबई : अगले वर्ष की शुरूआत के ही साथ महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव का दौर होगा। इन चुनावों की तैयारियों के लिए महाराष्ट्र में अभी से कैंपेनिंग प्रारंभ हो गई है। ऐसे में शिवसेना और भाजपा जो कि केंद्रीय और राज्य सरकार के गठबंधन में साथ हैं फिर से अपने मुद्दों को लेकर प्रतिस्पर्धी हो गए हैं। 

मुंबई, ठाणे, पुणे और नासिक सहित 10 निकाय में आयोजित होने वाले चुनाव से भारतीय जनता पार्टी - शिवसेना दोनों एक बार फिर अलग - अलग रास्तों पर जा सकती हैं। विशेषज्ञों से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए दोनों ही दल आपस में एक दूसरे को काटने की फिराक में हैं। मुंबई - भाजपा कार्यकारिणी द्वारा यह कहा गया कि बीएमसी में नवीन सहयोगियों को तलाशा जा सकता है।

दरअसल इस तरह की बात सामने आते ही यह जानकारी मिली है कि भाजपा और शिवसेना के बीच तल्खी बढ़ती जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व वाली सरकार की कुछ नीतियों का शिवसेना द्वारा विरोध किया जाता है। इतना ही नहीं सामना में सरकार विरोधी प्रकाशन से भी गठबंधन को काफी नुकसान हुआ है। इस मामले मेें पार्टी की कार्यकारिणी द्वारा कहा गया कि 1990 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और शिवसेना के बीच का पूल प्रमोद महाजन ने तैयार किया था।

भाजपा में शिवसेना का कोई भी मित्र नहीं था। एक लोकप्रिय समाचार पत्र में प्रकाशित जानकारी के अनुसार मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष संजय निरूपम द्वारा कहा गया कि शिवसेना दोनों ओर अच्छी दुनिया की चाहत रखती है। वे ऐसी ही शक्ति चाहती हैं। जनता समझदार है। ऐसे में वे किसी भी प्रयोग से बरगलाई नहीं जा सकती है।

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