जयंती विशेष: लोकोपकारक महाराज तुकोजीराव होल्कर द्वितीय

इंदौर का होल्कर राजघराना किसी परिचय का मोहताज़ नहीं है, इस मराठा साम्राज्य की स्थापना इंदौर में महाराज मल्हार राव होल्कर ने 1733 में की थी. इसी परिवार में महाराज तुकोजीराव होल्कर द्वितीय का जन्म 3 मई 1835 को होल्कर वंश के सरदार श्रीमंत संतोजी राव होल्कर के घर पुत्र रूप में हुआ था. जन्म के समय उन्हें नाम दिया गया श्रीमंत युकाजी जसवंत होलकर. 

तुकोजीराव द्वितीय की. 1844 में खांडा राव होलकर द्वितीय की मौत पर पूर्व महाराजा मार्थंद राव होलकर ने खुद के लिए सिंहासन पर दावा किया, लेकिन कई राजाओं द्वारा विरोध करने के कारण उन्हें राज्य नहीं दिया गया. यशवंत राव होलकर की विधवाओं में से एक कृष्णा बाई होलकर साहिबा ने भाओ संतोजी होलकर (मार्थंद राव के चाचा) के छोटे बेटे का नाम सुझाया, इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया था और युकाजी जसवंत होलकर को 23 जून 1844 को  महाराजधिराज राज राजेश्वर सवाई श्री सर तुकोजी राव होलकर द्वितीय के नाम से स्थापित किया गया.

बहुत कम लोग यह जानते होंगे कि तुकोजी राव होल्कर द्वितीय ने उस समय अंग्रेज़ों को रेलवे लाइन बिछाने के लिए 1 करोड़ रु का क़र्ज़ दिया था, यह कर्ज 101 वर्ष के लिए 4.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर दिया गया था और जमीन पूरी तरह नि:शुल्क मुहैया कराई गई थी.  25 मई 1870 को शिमला में वायसरॉय और गर्वनर जनरल इन कौंसिल ने इस समझौते पर मुहर लगाई थी. महारज के ही दिए गए पैसों से वह रेलवे लाइन डाली, जो आज इंदौर-खंडवा, इंदौर-देवास-उज्जैन और इंदौर-रतलाम-अजमेर तक जाती है. यहाँ तक कि रेल के इंजन को खींचने के लिए महाराज ने हाथी भी मुहैया करवाए थे. तुकोजीराव होलकर द्बितीय के 42 वर्ष लंबे शासन काल में इंदौर स्टेट ने अधोसंरचना के मामले में जबरदस्त विकास और समृद्धि हासिल की. ऐसे लोकोपकारक महाराज तुकोजी राव को उनकी जयंती पर सदर नमन. 

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