भैरव जयंती: श्री भैरव संकट हरण, मंगल करण कृपाल

सोमवार 21 नवंबर को भैरव जयंती के आयोजन की धूम देशभर में रहेगी। इस अवसर पर जहां भैरव मंदिरों में पूजा अर्चना और महाआरती के आयोजन होंगे तो वहीं भक्तों को भी प्रसाद बांटा जायेगी। भगवान भैरवनाथ शिव के अवतार माने जाते है। बाबा महाकाल की नगरी में काल भैरव का प्रसिद्ध मंदिर है, जहां तीन दिनों तक भैरव जयंती का उत्सव मनाया जायेगा। बाबा काल भैरव को तो भूत भावन भगवान महाकाल का सेनापति माना गया है।

चुंकि महाकाल उज्जैन के राजा और अधिपति माने गये है, इसलिये उनका सेनापति का भी स्थान उज्जैन मंे है। यह मंदिर प्राचीन है तथा अपने चमत्कारों के कारण देश विदेशों में प्रसिद्ध भी है। तंत्र शास्त्र में भैरवनाथ का विशेष स्थान है। तांत्रिक, भैरव की साधना कर सिद्धियां प्राप्त करते है लेकिन सामान्य लोग भी भैरव के सौम्य स्वरूप की पूजन अर्चन कर अपनी मनोकामनाओं को पूरी कर सकते है। रही बात दर्शन और आराधना की तो, कहा जाता है कि भैरवनाथ सामान्य पूजन अर्चन से ही प्रसन्न हो जाते है।

यदि कोई संकट आपको सता रहा है तो, ज्योतिष शास्त्र से जुड़े विद्वान भैरव आराधना की भी सलाह देते है। मान्यता है कि भैरव चालीसा या भैरव के सामान्य मंत्र उच्चारण से ही समस्त संकटों का निवारण हो जाता है।

भैरव चालीसा का दोहा इस प्रकार है

श्री गणपति, गुरू गौरिपद, प्रेम सहित धरी माथ

चालीसा वंदन करौं,  श्री शिव भैरवनाथ

श्री भैरव संकट हरण, मंगल करण कृपाल

श्याम वरण विकराल वपु, लोचन लाल विशाल।

मदिरापान करते है काल भैरव

राजाधिराज महाकाल की नगरी उज्जैन में विराजित बाबा काल भैरव का मंदिर किसी चमत्कार से कम नहीं है। यहां आने वाले हर व्यक्ति कि न केवल मनोकामना पूरी हो जाती है वहीं संकटों का भी समाधान होने में देर नहीं लगती है। मंदिर में विराजित काल भैरव मदिरापान भी करते है। मंदिर के पुजारी मंत्रोच्चार के साथ भक्तों द्वारा चढ़ाई गई मदिरा को तश्तरी में उड़ेल कर बाबा भैरवनाथ के मुख पर लगाते है और यह देखते ही देखते मुख के अंदर समा जाती है।

इस चमत्कार पर भले ही एक बार यकीन नहीं हो लेकिन यह सत्य है कि काल भैरव मदिरापान करते है, इसकी खोज भी कई बार हुई कि आखिर मदिरा कहां जाती है लेकिन सत्य यही सामने आया कि मदिरा सीधे काल भैरव के मुख में ही समाती है। भैरव जयंती के अवसर पर मंदिर में भव्य सवारी का आयोजन किया जाता है।

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