सेकंड हैण्ड कार खरीदने से पहले एक बार ज़रूर पड़े यह खबर

भारतीय बाजार में नये कारों के साथ ही सेकेंड हैंड कारों का बाजार भी तेज़ी से विकसित हॉप रहा है. यहाँ लोग सेकंड हैण्ड कार खरीद कर अपना स्टेटस सिंबल बढ़ाने में लगे है. लेकिन सेकेंड हैंड कार खरीदने से पहले हर किसी के दिमाग में बहुत सारे सवाल होते हैं. वैसे सेकेंड हैंड वाहन को खरीदना गलत नहीं होता है बशर्ते पुराने वाहन को खरीदने से पहले अपनी उसके बारें में पूरी तशदीक करना बेहद जरूरी होता है.

सेकेंड हैंड कार खरीदने के लिये टिप्‍स:

01- सबसे पहले अपनी मनपसंद कार का चयन करें सेकेंड हैंड कार खरीदने से पहले, आपको यह जानना सबसे ज्‍यादा जरूरी होता है कि आपको कौन सी कार खरीदनी है। आपको कौन सा मॉडल चाहिए और कौन सी कार आपके बजट में होगी। सेकेंड हैंड कार बाजार में सिडान, हैचबैक, एसयूवी, एमयूवी सभी मौजूद होती है तो सबसे पहले आप यह तय करें कि आप किस बॉडी टाइप की कार खरीदना चाहते है?

02- बजट का रखें ध्‍यान अपनी मॉडल को चुनने के बाद आपको अपने जेब पर गौर करना दूसरा चरण है। क्‍योंकि बाजार में जो भी मॉडल आप खरीदना चाहतें है वो कई रेंज में उपलब्‍ध होती है। यदि आपने मारूति स्विफ्ट को चुना है तो बाजार में एक साल, दो साल, से लेकर तीन साल तक की पुरानी कारें मौजूद हो सकती है। सभी मॉडल एक ही है लेकिन उनकी कीमत में अंतर होगा तो कार के मॉडल को चुनने के बाद अपने बजट को तय करें।

03- कार के मॉडल पर करें रिसर्च मॉडल को तय करने के बाद उस पर शोध कार्य अवश्‍य करें। तय किये गये मॉडल के बारें में ज्‍यादा से ज्‍यादा जानकारियां इकट्ठा करें। उस कार के बारें में मैग्‍जीन, वेबसाईट के साथ-साथ जिनके पास वो कारें है उनसे मिलकर कार के बारें में जानकारियां हासिल करें। इसके अलावा यदि समय हो तो कार के रिव्‍यू आदी को पढ़े। कोशिश करें कि जब आप अपने मॉडल को तय करें तो एक और कार का विकल्‍प साथ लेकर चलें।

04- सही डीलर का चुनाव सही कार मॉडल चुनने के साथ-साथ सही जगह से कार खरीदना भी जरूरी होता है। बाजार में सैकेंड हैंड कारों की बहुत बड़ी मंडी है। जितने शहर में नये कारों के शोरूम है उससे कहीं ज्‍यादा पुराने कारों के बिक्री केंद्र है। सबसे पहले कार के दो-तीन डीलरों के स्‍टोर्स पर एक बार जरूर जायें और उनसे कार के मॉडल, कीमत, और उनके द्वारा की जाने वाली कागजी कार्रवाइयों के बारें में पूरी जानकारी हासिल करें। इसके अलावा आस-पास के लोगों से उस डीलर के पूर्व के डीलों के बारें में अवश्‍य जानकारी हासिल करें।

05- व्‍यक्तिगत विक्रेता से सम्‍पर्क: कार डीलर्स के अलावा कुछ लोग अपने वाहनों को खुद ही बेचना चाहतें है। इसके लिए वो अपने आस-पास के लोगों को इस बारें में जानकारी देतें है कि वो अपनी कार को बेचना चाहतें है। इसके अलावा वो न्‍यूज पेपर, वर्गीकरण वेबसाईट आदी का भी सहारा लेतें है। सीधे कार मालिक से कार खरीदने पर एक फायदा आपको यह होता है कि यदि आप डीलर से सम्‍पर्क करतें है तो कार पर अपना मुनाफा रखकर ही आपको कार की कीमत बतातें है। तो सीधे कार मालिक से सम्‍पर्क करना आपकी जेब के लिए भी राहत देगा।

06- कार का प‍रीक्षण: अपने कार के डीलर, या फिर खुद मालिक को चुनने के बाद, या यूं कहें क‍ि अपनी कार को चुनने के बाद अगला चरण जो आता है वो कार का परीक्षण। कार के परीक्षण के डीलर, या मालिक से एक समय नीयत करें जब आप देखना चाहतें है। कार को देखतें समय डीलर, या मालिक से कार में किसी भी प्रकार कोई खराबी या फिर कोई अन्‍य कमी के बारें साफ तौर पर पूछें। इसके अलावा पूर्व में हुई कार से किसी भी प्रकार की दुर्घटनाओं के बारें में पूरी जानकारी हासिल करें।

07- कार का टेस्‍ट ड्राइव: पूर्व में बताई गई बातों की पूरी तश्‍दीक हो जाने पर अगला चरण कार की टेस्‍ट ड्राइव का आता है। कार के टेस्‍ट ड्राइव पर जाने से पूर्व अपने साथ साथ एक मकैनिक अवश्‍य रखें। क्‍योंकि जब कारों को बिक्री को रखा जाता है लोग उपरी तौर पर वाहन में कोई भी खामी नहीं रखतें है और अंदरूनी खामियों को छुपाने की पूरी कोशिश करतें है। जिस पर आम लोगों की नजर पड़ना मुश्किल होंता है। इस मामले में एक मकैनिक आपकी पूरी मदद करेगा। कार को चलाते समय इस बात पर गौर करें कि सारे फीचर्स, स्‍वीच, बटन, ब्रेक, क्‍लच, गियर, एक्‍सलेटर आदी ठीक प्रकार से काम कर रहें है कि नहीं। 

08- दस्तावेज़ों की सही जांच: कार की टेस्‍ट ड्राइव करने के बाद उसकी इंजन दक्षता, और अन्‍य फीचर्स आदी की जांच करने के बाद अगला चरण आता है कार के दस्‍तावेजों की जांच का। कार से संबंधित जितने भी दस्‍तावेज होतें है उनकी ठीक प्रकार से जांच करनी चाहिए। कार की सर्विस रिकार्ड, पंजीकरण, इश्‍योरेंश, आदी सभी की पुख्‍ता जांच करने के बाद ही निर्णय देना चाहिए।

09- कार की सौदेबाजी: किसी भी चीज को खरीदने में जो सबसे ज्‍यादा माइने रखता है वो होता है बेचने और खरीदने वाले की बीच होने वाली सौदेबाजी। सौदेबाजी का मतलब दोनो पक्ष उक्‍त वस्‍तु की कीमत के लिए आपस में जो लेन-देन की बात करतें है। हमेशा कीमत की शुरूआत कम से करें जितना कि आपका बजट है उससे कम कीमत से शुरूआत करें। सौदा करना भी एक खास कला होती है इसलिए किसी बेहतर हितैषी को भी साथ रखें, और लेने देन की बात करें। दोनो पक्षों की रजामंदी के बाद अब आप अपनी मनपसंद कार को अपना सकतें है। 

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