बसंत पंचमी पर जरूर गाये माँ सरस्वती की यह वंदना और गीत

Feb 09 2019 05:00 PM
बसंत पंचमी पर जरूर गाये माँ सरस्वती की यह वंदना और गीत

आप सभी को बता दें कि बसंत पंचमी मां सरस्वती को समर्पित त्यौहार माना जाता है. ऐसे में इस दिन उनकी पूजा पर उनकी वंदना या वंदना गीत न हों ऐसा हो ही नहीं सकता है. जी हाँ, मां सरस्वती वंदना का महत्व प्राचीन काल से ही भारतीय समाज में रहा है और यह भी एक कारण है कि उनकी वंदना के ज्यादातर स्लोक संस्कृत में हैं. आप सभी को बता दें कि हिन्दीं के मूर्धन्य कवि सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" ने जब से 'वीणावादिनि वर दे' की रचना की शायद तब से लोग हिन्दी में उनकी वंदना करने लगे हैं और आज के समय में उनका त्यौहार मनाया जाता है. इस बार 10 फरवरी को बसंत पंचमी मनाने के बारे में कहा गया है और इस मौके पर देशभर के सरस्वती मंदिरों पूजा स्थलों में मां सरस्वती की पूजा की जाने वाली है. इसमें उनकी वंदना भी की जाएगी. जी हाँ, आज हम आपको बताने जा रहे हैं सरस्वती वंदना जिसे आप कल माँ सरस्वती की पूजा के दौरान बोल सकते हैं. 

सरस्वती वंदना - 

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला
या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा
या श्वेतपद्मासना.
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥

सरस्वती वंदना गीत-

वर दे, वीणावादिनि वर दे !
प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव
        भारत में भर दे !

काट अंध-उर के बंधन-स्तर
बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर;
कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर
        जगमग जग कर दे !

नव गति, नव लय, ताल-छंद नव
नवल कंठ, नव जलद-मन्द्ररव;
नव नभ के नव विहग-वृंद को
        नव पर, नव स्वर दे !

वर दे, वीणावादिनि वर दे.


 - सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"

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