बनिया और जाट

बनिया और जाट काम से दूसरे गाँव जा रहे थे। 
जाट को बनिये के 2000 रुपए चुकाने थे, पर वह टालमटोल करता रहता था। सुनसान रास्ता आया तो सामने से कुछ लुटेरे आते दिखाई पड़े। लुटेरों ने दूर से ही कड़क कर उन्हें ललकारा। 
जाट ने जल्दी से अपनी धोती की फेंट में से नोटों की गड्‍डी निकालकर बनिये को थमाते हुए कहा - लाला जी, ये 1800 रुपए सँभाल लो। अब 200 ही रह गए।

 

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