आखिर क्यों दी जाती है बकरा ईद पर बकरे की कुर्बानी

आखिर क्यों दी जाती है बकरा ईद पर बकरे की कुर्बानी

दुनियाभर में 23 अगस्त को मुस्लिम अपना त्यौहार मनाने के लिए बेताब हैं. आप सभी को बता दें कि 23 अगस्त को को भारत में बकरा ईद, ईद-उल-अजहा 2018 मनाया जाने वाला है. यह दिन सभी मुस्लिमों के लिए बहुत ही ख़ास होने वाला है. इस दिन मुस्लिम भक्त अपनी भक्ति को दर्शाते हैं और अपने विश्वास को भी दर्शाते हैं.

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अपने विश्वास को दर्शाने के लिए इस दिन मुस्लिम अपने पैगंबर को महान त्याग देते हैं. ईद-उल-अजहा के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग अपने पैगंबर को खुश करने के लिए बकरे या किसी अन्य पशु की कुर्बानी देते हैं और इसके द्वारा वह अपनी भक्ति को दर्शाते हैं. इस्लाम में इस दिन को फर्ज़-ए-कुर्बान का दिन कहा जाता है क्योंकि इस दिन मुसलमान अपने पैगंबर के लिए अपने फर्ज को अदा करते हैं. यह मुसलमानों का एक ख़ास त्यौहार माना जाता है और अलग-अलग देशों में इस दिन को अलग-अलग तारीखों पर मनाया जाता है. इस दिन को मनाने के पीछे की भी एक कहानी है जो कुछ इस कदर है.

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कहा जाता है - 'इब्राहिम अलैय सलाम नाम का एक आदमी था जिसकी कोई भी संतान नहीं थी. उसने काफी मन्नतें मांगी और उसके बाद उसके घर में एक लड़के का जन्म हुआ. लड़के के जन्म के बाद उन्होंने उसका नाम इस्माइल रखा. एक दिन इब्राहिम ने अपने सपने में अल्लाह को देखा जिन्होंने उनसे कहा कि तुम्हे दुनिया में जो भी चीज़ सबसे प्यारी है उसकी कुर्बानी दे दो. अल्लाह के हुक्म को मानना इब्राहिम की मज़बूरी थी और उन्हें सबसे ज्यादा प्यारा उनका बेटा था लेकिन उन्होंने अपने बेटे की कुर्बानी देने में कोई हिचकिचाहट महसूस नहीं की. इब्राहिम ने अपनी आँखों पर पट्टी बांधकर अपने बेटे की बलि देने के लिए जैसे ही छुरी चलाई वैसे ही एक फ़रिश्ते ने उनके बेटे को हटाकर वहां एक मेमना रख दिया और कुर्बानी हुई मैंने की. उसके बाद से ही उस दिन को ईद-उल-अजहा नाम से पुकारा जाने लगा और बकरे की कुर्बानी दी जाने लगी.'

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