भारत की आजादी से पहले इस आयोग में काम कर चुके है बाबा साहेब अंबेडकर

आधुनिक भारत कहे या विकसित हिंदुस्तान के इतिहास को महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के बाद सबसे ज्यादा यदि किसी ने प्रभावित किया है तो वे हैं डॉ. भीमराव अंबेडकर. विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने और उच्च पदों पर काम करने के बावजूद डॉ. अंबेडकर को जिस जातिगत घृणा का सामना करना पड़ा, उससे उनके मन में ब्राह्मणवादी जाति-व्यवस्था के विरुद्ध तीव्र घृणा पैदा हुई और उन्होंने इसे सारी सामाजिक बुराइयों और असमानता की जड़ माना.

छात्र जीवन की बात करें तो विश्व के प्रमुख कॉलेज और विश्वविद्यालयों से उच्च शिक्षा में उपाधियाँ हासिल करने के बाद इन्होने पहले अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के तौर पर अपना करियर शुरू किया. उसके बाद इन्होने वकालत में भी करियर शुरू किया और समाज में दलितों की ख़राब दशा को सुधारने के अथक प्रयास किये. अंत में देश की राजनीति में आ गए और फिर पूरी तरह से इसी क्षेत्र में आजीवन अपना योगदान दिया.

बहुत कम लोग इस बात को जानते है कि 1925 में बाबा साहेब को बॉम्बे प्रेसिडेंसी समिति ने साइमन आयोग में काम करने के लिए नियुक्त किया. जबकी इस आयोग का विरोध पूरे भारत में किया जा रहा था.

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