साईकिल पर च्यवनप्राश बेचा करते थे योग गुरू बाबा रामदेव

उज्जैन : योग गुरू बाबा रामदेव इन दिनों उज्जैन में चल रहे सिंहस्थ 2016 में लोगों को विभिन्न रोगों से जुड़े योग और आसन सिखा रहे हैं। यही नहीं बाबा राम देव अपने अनुयायियों को सुखी जीवन के कुछ टिप्स भी दे रहे हैं। उनका योग शिविर गुरू कार्ष्णि कुंभ मेला शिविर में चल रहा है। तड़के 5 बजे से सुबह 7.30 बजे तक देशभर से आए संत और आमजन बाबा रामदेव से योग सीख रहे हैं। मगर उनके बारे में यह कम लोग ही जानते हैं कि बाबा रामदेव अपने जीवन में पहले साइकिल चलाकर च्यवनप्राश बेचा करते थे।

मगर आज उनके पतंजलि आयुर्वेद और योग संस्थान को हर कोई जानता है इतना ही नहीं विदेशों में भी उनका बड़ा नाम है। यह सब बचपन से ही योग को लेकर उनकी रूची के कारण ही संभव हो सका है। बाबा रामदेव का हर दिन तड़के योग के साथ प्रारंभ हो जाता है। वे तड़के करीब 5 बजे से योग का प्रशिक्षण देते हैं।

उनका नाश्ता, खाना एक निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होता है। नाश्ते में और भोजन में वे फलों का रस, सब्जियों का रस आदि लेना नहीं भूलते। उनका भोजन विशेषतौर पर नियुक्त रसोईये ही तैयार करते हैं। वे जहां भी जाते हैं उनके रसाईये भी उनके साथ होते हैं। बाबा के साथ उनका एक ही पीए होता है वह बाबा के आदेश को लिख लेता है। बाबा से मिलने के लिए लोगों को अपना नाम, नंबर और मिलने का कारण भी बताना पड़ता है। बाबा रामदेव दिन के समय में अपने कारोबार की मॉनिटरिंग भी करते हैं। यह बात विशेष है कि बुनकरों को रोजगार मिलने के उद्देश्य से वे हाथ से बने कपड़े पहनते हैं।

वे हरियाणा के थे मगर अब उनका आश्रम और मुख्यालय हरिद्वार में है। उनके पतंजलि उद्योग की कीमत करीब 2 हजार करोड़ रूपए है। बाबा रामदेव हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के अली सैयदपुर गांव से संबंधित हैं। उनका बचपन हरियाणा के महेंद्रगढ़ के समीप अलीपुर गांव में गुजरा। योग शिविर में जाने के कारण उनकी पहचान अपनी उम्र स अधिक उम्र के लोगों से होने लगी। इसके बाद उनका योग के प्रति लगाव बढ़ता चला गया और फिर वे घर छोड़कर ऋषिकेश जाने के लिए तैयार हुए।

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