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यूपी में फेक स्टिंग के आरोपी जर्नलिस्टों की पेशी न होने पर आजम बिफरे

Feb 26 2016 05:08 PM
यूपी में फेक स्टिंग के आरोपी जर्नलिस्टों की पेशी न होने पर आजम बिफरे

लखनऊ. उत्तरप्रदेश में पूर्व में हुए मुजफ्फरनगर दंगों के समय उत्तरप्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री आजम खान का फेक स्टिंग चलाने वाले निजी चैनल के आरोपियों की विधानसभा में पेशी नही हो पाई. तथा इस मसले पर काफी बहस की भी स्थिति सदन में बनी. इस मामले में यूपी में मंत्री पद पर काबिज आजम खान ने अपने बयान में कहा है कि इस पुरे ही मामले में मुजफ्फरनगर में जो दंगे हुए थे उसके स्टिंग का ऑर्डर मेरा नहीं बल्कि दरोगा का था, जिसमे कि मेरा नाम लि‍या गया है।

आजम ने कहा कि यह स्टिंग विधानसभा सदन के सम्मान का मामला है। आजम ने कहा कि अगर इसमें सदन का एक भी सदस्य इससे इत्तेफाक नहीं रखता है तो मैं अभी अपने पद से इस्तीफा दे देता हूं।" इस दौरान इस मसले पर वह अलग अलग पार्टियो के लोगो ने अपनी राय व्यक्त की.

तथा इस स्टिंग मामले पर सभी पार्टियां जहां पर एकजुट रही है तो वही भारतीय जनता पार्टी इससे कोसो दूर रही.  ऐसे में आजम ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी पर राजनीति‍क खुदगर्जि‍यां इतनी हावी हो गई हैं कि‍ राष्ट्रवाद की परि‍भाषा पूरी तरह से विभक्त हो गई है. तथा बीएसपी ने कहा कि ऐसा लगता है कि यह स्टिंग ऑपरेशन शायद बीजेपी कि और से तो नही किया गया. बीएसपी के इस बयान को भाजपा ने सिरे से नकार दिया है. आपको बता दे कि यह पूरा ही मामला कुछ इस प्रकार है कि 2013 के दौरान मुजफ्फरनगर में हुए दंगे में दिखाया गया है कि आजम खान ने मुजफ्फरनगर में छेड़छाड़ के आरोपी पर कड़ी कार्यवाही न करने के पुलिस को दिशा निर्देश जारी किए, जिसके चलते दंगा भड़का.

जिसके कारण 26 फरवरी को सदन में चैनल की मैनेजिंग एडिटर सुप्रिया प्रसाद, आउटपुट हेड मनीष कुमार, एसआईटी हेड दीपक शर्मा, इसी ग्रुप के इंग्लिश चैनल के मैनेजिंग एडिटर राहुल कंवर, एडिटर और एंकर पुण्य प्रसून बाजपेई, रिपोर्टर हरीश शर्मा, एंकर गौरव सावंत और पदम्बा जोशी को बुलाया गया है। तथा विधानमंडल की सेवन मेंबर कमेटी ने इन सबके ऊपर एडिटर सहित कई लोगों के खिलाफ आईपीसी की अलग-अलग धाराओं में कार्रवाई की सिफारिश की गई है.