फिर एक धार्मिक संस्था सवालों के घेरे में, सम्मोहन से जुड़ा सनातन संस्था का अस्तित्व

नई दिल्ली : हाल ही में महाराष्ट्र की एक राष्ट्रीय स्तर की धार्मिक संस्था सनातन संस्था सवालों के घेरे में आ गई है। एक प्रमुख राष्ट्रीय समाचार चैनल द्वारा इस बात को लेकर खुलासा किया है। चैनल  ने अपने टेलिकास्ट में ऐसे लोगों से चर्चा की है जो सनातन संस्था में अपनाए जाने वाले सम्मोहन के शिकार हो गए और अब वे सनातन आश्रम से लौटकर नहीं आना चाहते हैं। इस दौरान कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि सनातन संस्थान ने उनकी बेटियों और पत्नी को सम्मोहन के माध्यम से प्रभावित किया और वे घर बार छोड़कर पैसा व गहने लेकर आश्रम में ही चली गईं।

मामले में आश्रम पर आरोप लगाए गए हैं कि सम्मोहन विद्या के माध्यम से चिकित्सकों तक का मन प्रभावित किया गया। इस मामले में एंटीटेररिस्ट स्क्वाड ने अपनी जांच प्रारंभ कर दी है। हालांकि इस पर एक आतंकी संस्था होने का आरोप भी लगाया गया है। इस तरह की मांग की गई है कि इस संस्था पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। दरअसल वैज्ञानिक और नासिक निवासी विजय रोकड़े ने सनातन संस्था के के खिलाफ शिकायत की।

दरअसल इनकी पत्नी घर छोड़कर चली गई। अब वह सनातन संस्थान में ही रहना चाहती है। केंद्र को उन्होंने सनातन संस्था पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव भी भेजा था। उनका आरोप है कि उनकी पत्नी पर सम्मोहन विद्या का उपयोग किया गया। पेशे से रिसर्च वैज्ञानिक विजय रोकड़े ने कहा कि सनातन संस्थान ने सम्मोहन से उनकी गृहस्थी प्रभावित की। रोकड़े द्वारा यह आरोप भी लगाया गया है कि संस्था के प्रमुख चिकित्सक जयंत आठवले सम्मोहन की शक्ति का उपयोग धर्म के नाम पर साधकों को प्रभावित करने के लिए करते हैं और उन्हें बरगला दिया जाता है। ऐसा ही आरोप महाराष्ट्र के अहमदनगर के भानुदास ने लगाया। 

उन्होंने कहा कि सनातन संस्था के बहकावे में आकर उनकी बेटी डाॅक्टर स्वाति वर्ष 2004 में घर छोड़कर संस्था के आश्रम में चली गई। उन्होंने अपनी बेटी को वापस लाने का बहुत प्रयास किया लेकिन वह घर आना नहीं चाहती है। उन्हें आस लगी है कि उनकी बेटी स्वाति फिर से लौट सकती है।

भानुदास भी अपने दो बेटे और एक बेटी को सनात संस्थान में खो चुके हैं। उनकी बेटी स्वाति पेशे से चिकित्सक थी मगर अचानक वह घर छोड़कर चली गई। जब स्वाति का परिवार उसे लेने गया तो आश्रम के लोगों ने उनके साथ मारपीट की। इस मामले में सनातन संस्था को लेकर राजनीतिक विरोध भी बढ़ने लगा है। भानुदास की सहायता में डाॅ. दाभोलकर सामने आए लेकिन डाॅ. दाभोलकर की हत्या कर दी गई। हालांकि संस्था द्वारा साधकों को बंधक बनाकर रखने के आरोपों को खारिज कर दिया गया। दूसरी ओर उप्र के भदोही में रहने वाले चैरसिया परिवार की दोनों बेटियों प्रीति और प्रिया भी घर छोड़कर सनातन संस्था में जा पहुंची और अब वे सनातन संस्था में ही रह रही हैं।

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