अब विधानसभाओं और सांसद में नहीं चलेगा 'वन्दे मातरम्' ?

अब विधानसभाओं और सांसद में नहीं चलेगा 'वन्दे मातरम्' ?
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पटना:  ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (AIMIM) चीफ और हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी के विधायकों ने बिहार विधानसभा में नया बवाल खड़ा कर दिया है. दरअसल, ओवैसी की पार्टी के पांचों विधायकों ने शुक्रवार को विधानसभा में राष्ट्रगीत वंदे मातरम गाने से इंकार कर दिया. यही नहीं, विधायकों ने ये भी कहा कि स्पीकर हम पर जबरदस्ती राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान गाने की परंपरा थोप रहे हैं.

दरअसल, इस बार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान विधानसभा के स्पीकर विजय कुमार सिन्हा (Vijay Kumar Sinha) ने सत्र के पहले दिन राष्ट्रगान (जन-गण-मन) और अंतिम दिन राष्ट्रगीत (वंदे मातरम) गाने की परंपरा आरंभ की है. शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन जब राष्ट्रीय गीत गाया जा रहा था, तो उसी दौरान ओवैसी की पार्टी के पांचों विधायकों ने राष्ट्रीय गीत गाने से साफ़ मना कर दिया.

शीतकालीन सत्र के समापन के बाद AIMIM के बिहार प्रदेश इकाई के अध्यक्ष और MLA अख्तरुल इमान विधानसभा स्पीकर विजय कुमार सिन्हा पर जमकर निशाना साधा और राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत की नई परंपरा थोपने का इल्जाम लगाया. अख्तरुल इमान ने दलील दी कि संविधान में कहीं भी नहीं लिखा गया है कि राष्ट्रीय गीत गाना जरुरी है. बता दें कि ये पहली बार नहीं है, जब AIMIM के नेताओं ने राष्ट्रीय गीत गाने से मना किया हो, ओवैसी खुद भी कई बार कह चुके हैं कि मैं वन्दे मातरम् नहीं बोलूंगा, मेरी गर्दन पर छूरी रख देंगे तो भी नहीं बोलूंगा.

यहाँ पाठकगण एक बात पर गौर करें, अभी ओवैसी की पार्टी के बिहार में मात्र 5 विधायक हैं, और उनकी पार्टी यूपी में भी चुनाव लड़ने जा रही है. इससे पहले बंगाल में भी लड़ चुकी है. अगर इसी विचारधारा के साथ AIMIM के प्रत्याशी जीतते हैं तो क्या विधानसभाओं या संसद में राष्ट्रीय गीत या राष्ट्र गान चल पाएगा ? क्या वंदे मातरम या जय हिन्द, या भारत माता की जय के नारे लगेंगे ? ये मेरा व्यक्तिगत मत है कि किसी धर्म को इतना कमज़ोर नहीं होना चाहिए जो चंद शब्द (वो शब्द जो मातृभूमि का यशगान करते हों) कहने से खतरे में आ जाए या ऐसा कहने से उस मजहब के नियम टूट जाएं. क्या यह उन शहीदों का अपमान नहीं है, जो वन्दे मातरम् या भारत माता की जय के नारे लगाते हुए फांसी के फंदे पर झूल गए ? अश्फाखउल्लाह खान को भी कभी वन्दे मातरम् कहने में धर्म आड़े नहीं आया, फिर ओवैसी को क्यों ?  

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