अंतरराष्ट्रीय प्राकृतिक आपदा न्यूनीकरण दिवस आज, जानिए इसका उद्देश्य और इतिहास

नई दिल्ली: प्राकृतिक आपदा कभी कहकर नहीं आती, किन्तु इसके जोखिम को कम करने के लिए आज पूरे विश्व में कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में चर्चा का केंद्र यह भी रहता है कि अब प्रकृति से छेड़छाड़ को यदि न रोका गया तो धरती पर जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।

अंधाधुंध वृक्षों की कटाई, मिट्टी का क्षरण और जल एवं वायु प्रदूषण, ये सब हमारे अस्तित्व को खतरे में डाल रहे हैं। इसी बात को लेकर जागरूक करने के लिए प्रति वर्ष 13 अक्तूबर को अंतरराष्ट्रीय प्राकृतिक आपदा न्यूनीकरण दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2009 से हुई थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने अक्तूबर के दूसरे बुधवार को प्राकृतिक आपदा को कम करने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का पालन करने का फैसला लिया। बाद में इसमें संशोधन कर 13 अक्तूबर की तिथि निर्धारित की गई।

प्राकृतिक आपदा न्यूनीकरण के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस हमारे पर्यावरण में होने वाले बदलावों के परिणामों के बारे में सतर्कता बढ़ाने के लिए हर साल मनाया जाता है। लाखों लोगों को इससे निपटने के लिए आगे आने और उनकी कोशिशों के बारे में बात करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि वे इस खतरे को समझ सकें, जिसकी वजह से लोगों को जान-माल का नुकसान हुआ है। ये लोग जागरूकता बढ़ाने के अभियानों में शामिल होने के लिए दूसरों को प्रोत्साहित करते हैं और प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस पर कई गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।  

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