कोयला खदान में काम करते थे पिता, खुद बनना चाहते थे पुलिस.. लेकिन बन गए तेज गेंदबाज़

एक ऐसा भारतीय गेंदबाज़, जो पुलिस में जाने की तैयारी करते-करते क्रिकेटर बन गया. क्रिकेटर भी ऐसा जो तूफानी गति से गेंदबाजी करता है, मीडियम पेस नहीं. टेनिस बॉल से बॉलिंग करने के कारण गेंद को तेज फेंकना सीखा और 150 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार तक आसानी से पहुंच जाता था. इसी के दम पर भारतीय टीम में जगह बनाई. मगर फिर वही हुआ जो कई और भारतीय गेंदबाजों के साथ हुआ. यानी चोटों के कारण बुरा असर पड़ा और रफ्तार कम हो गई. यह गेंदबाज़ है उमेश यादव. आज उनका जन्मदिन है. मूल रूप से यूपी के रहने वाले उमेश यादव डोमेस्टिक क्रिकेट में विदर्भ के लिए खेलते हैं. उमेश यादव के पिता कोयला खदान में काम किया करते थे. उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी.

ऐसे में 12वीं तक पढ़ाई के बाद उमेश यादव ने सेना, पुलिस और CRPF जैसी नौकरियों के लिए तैयारी आरंभ की. उनकी कदकाठी अच्छी थी और इसी कारण सैन्य बलों में जाने के लिए उन्होंने प्रयास किया, किन्तु सफलता नहीं मिली. इसी दौरान वे क्रिकेट खेलने लगे. उमेश ने 19 वर्ष की आयु में क्रिकेट खेलना शुरू किया था. वे टेनिस बॉल से ही खेलते थे. इसी से खेलते हुए उन्होंने अपनी रफ़्तार से सबका ध्यान खींचा. टेनिस बॉल से खेलने के कई साल बाद उन्हें लेदर बॉल से खेलने का अवसर मिला था. उमेश यादव ने बहुत बाद में लेदर बॉल से खेलना आरंभ किया. इस दौरान 140 किमी प्रतिघंटे से ऊपर की रफ़्तार और गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की काबिलियत ने सबका ध्यान खींचा. 

इसके साथ ही वे कमाल की बाउंसर भी डाल सकते थे. इसके कारण 2008-09 में अपने पहले ही रणजी सीजन में विदर्भ के लिए चार मुकाबलों में 14.60 की औसत से 20 विकेट निकाले. इसके बाद 2010 के IPL सीजन के लिए दिल्ली डेयरडेविल्स (DC) ने उन्हें चुना. यहां भी उनकी तेज गेंदबाजी ने सभी को प्रभावित किया. इस खेल के बाद उन्हें वेस्ट इंडीज में टी20 विश्व कप में चोटिल प्रवीण कुमार की जगह उमेश यादव को रिप्लेसमेंट के तौर पर लिया गया. इसी साल दक्षिण अफ्रीका दौरे पर टेस्ट टीम के साथ गए. उमेश यादव ने अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम नवंबर 2011 में वेस्ट इंडीज सीरीज से रखा.

पहली ही श्रृंखला में दो टेस्ट में नौ विकेट उनके नाम आए. इस खेल के बाद वे भारतीय टीम तक ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गए. इस दौरे पर टीम इंडिया बुरी तरह हारी, लेकिन उमेश ने 14 विकेट लेकर अपनी प्रतिभा दिखा दी. उमेश की जगह पक्की हो गई. लेकिन करियर आगे बढ़ने के साथ ही चोटें भी पीछे-पीछे आईं. इसके कारण उनकी रफ़्तार में कमी भी आई. किन्तु टेस्ट क्रिकेट में उनका अच्छा प्रदर्शन जारी रहा. हालांकि एकदिवसीय मुकाबलों में जरूर उमेश का खेल ऊपर-नीचे रहा. 2015 के विश्व कप के लिए उन्हें भारतीय टीम में चुना गया. टूर्नामेंट में उन्होंने 18 विकेट झटके और भारत को सेमीफाइनल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई,

उमेश यादव IPL में काफी डिमांड में रहे है. किन्तु यहां विकेट लेने के साथ ही वे कापी महंगे भी रहते हैं. साथ ही कंसिस्टेंसी की कमी भी नज़र आई है. IPL में उनका सफर दिल्ली डेयरडेविल्स के साथ आरंभ हुआ था. यहां वे चार सीजन तक खेले. 2014 में वे कोलकाता नाइटराइडर्स के साथ जुड़े और इसके साथ भी चार सीजन तक खेले. IPL 2018 में RCB ने उन्हें ले लिया. यहां पहले ही सीजन में 20 विकेट लिए. किन्तु 2021 में उन्हें रिलीज कर दिया गया. अब वे दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेल रहे हैं.

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