1953 को मनाया गया था पहला राष्ट्रीय हिंदी दिवस, जानिए हिंदी के बारे में क्या थी महात्मा गांधी की राय

नई दिल्ली: हिंदी विश्व की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। चीन की भाषा मंदारिन और इंग्लिश के बाद हिंदी बोलने वाले लोगों की आबादी तीसरे नंबर पर है। हिंदी भारत की संस्कृति की संवाहक है, इसलिए 14 सितंबर को पूरे देश में हिंदी दिवस मनाया जाता है। हिंदी दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य इस भाषा को बचाए और बनाए रखना है। 

दरअसल, भारत में अंग्रेजों के आने के बाद से अंग्रेजी का चलन बढ़ा है, जो निरंतर बढ़ता ही जा रहा है। इस कारण हिंदी की अनदेखी भी हो रही है। इसे रोकने और हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए ही हिंदी दिवस मनाया जाता है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है, किन्तु भारत में 14 सितंबर के दिन हिंदी दिवस मनाते हैं। महात्मा गांधी ने कहा था कि हिंदी जनमानस की भाषा है और इसे देश की राष्ट्रभाषा घोषित करने की सिफारिश भी की थी। हालांकि हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा आज तक नहीं मिल पाया है, किन्तु हिंदी हमारी राजभाषा अवश्य बन चुकी है।

14 सितंबर, 1949 को संविधान सभा में देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया गया था। इसके बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू की सरकार ने इस दिन को हिंदी दिवस के तौर पर मनाने का फैसला लिया है। हालांकि वर्ष 1950, 1951 और 1952 में हिंदी दिवस नहीं मनाया गया था। आधिकारिक तौर पर पहला हिंदी दिवस 14 सितंबर 1953 को मनाया गया था।

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