एक खुफिया जासूस से रूस के राष्ट्रपति बनने तक, बेहद दिलचस्प रहा है पुतिन का सफर

विश्व के सबसे ताकतवर नेताओं में शुमार रूस के व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putii) आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं. विगत 22 वर्षों से रूस की सत्ता के काबिज पुतिन 68 साल हो गए हैं.  आज भले ही रूस का विश्व में वह कद ना रहा हो कभी सोवियत संघ (USSR) का हुआ करता था, किन्तु कई चुनौतियों के बाद भी पुतिन ने रूस के रूतबे को बरक़रार रखा है. एक KGB खुफिया जासूस से रूस के राष्ट्रपति पद तक पहुंचे पुतिन की कई बाते ऐसी हैं जो उन्हें दुनिया के किसी भी राष्ट्रप्रमुख से बहुत ही अलग बनाती हैं.

पुतिन का जन्म 7 अक्टूबर 1952 को लेनिनगार्ड में हुआ था, जो आज सेंट पीटर्सबर्ग नाम से पहचाना जाता है. उनके दादा व्लादिमीर लेनिन,  जोसेफ स्टालिन के निजी रसोइया थे. बेहद गरीब परिवार में जन्में पुतिन का बचपन कठिन परिस्थितियों में गुजरा और संघर्ष कर उन्होंने लेलिनगार्ड यूनिवर्सिटी से लॉ में ग्रेजुएशन किया. कॉलेज की पढ़ाई के बाद पुतिन को सोवियत संघ की खुफिया एजेंसी में एक मामूली ओहदा मिला, जिसके बाद वे KGB में लेफ्टिनेंट कर्नल की रैंक तक पहुंचने में कामयाब रहे. इस पद से इस्तीफा देने के बाद 1991 में पुतिन का सियासी करियर आरंभ हुआ. 1996 में वे मास्को गए जहां उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति बोरिस येल्त्सिन के प्रशासन से जुड़ने का मौका मिला.

बताया जाता है कि येल्त्सिन प्रशासन की अरजाकता का लाभ उठाकर कई लोग सत्ता तक पहुंचना चाहते थे और उन्होंने ही पुतिन को येल्त्सिन का उत्तारिधाकारी बनाने में अहम भूमिका निभाई. येल्त्सिन के इस्तीफे से पहले पुतिन फेडरल स्क्यूरिटी सर्विस के डायरेक्टर और रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव रह चुके थे. 1999 में कुछ दिनों के लिए वे मंत्री भी रहे और फिर येल्त्सिन के इस्तीफे के बाद वे कार्यवाहक राष्ट्रपति बने. इसके चार माह बाद हुए चुनावों में औपचारिक रूप से पुतिन को देश के राष्ट्रपति चुन लिया गया, इसी पद पर वे पिछले 22 वर्षों से काबिज हैं.

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