भारत के महान संत पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य, जिन्होंने साधना को जीवन और सेवा को ही धर्म माना...

Sep 20 2019 01:00 AM
भारत के महान संत पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य, जिन्होंने साधना को जीवन और सेवा को ही धर्म माना...

पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य का जन्म 20 सितम्बर,1911 (आश्विन कृष्ण त्रयोदशी विक्रमी संवत् 1967) को यूपी के आगरा जनपद के अंतर्गत आने वाले आंवलखेड़ा गांव में हुआ था। उनका बाल्यकाल गांव में ही बीता। पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य के पिता श्री पं.रूपकिशोर जी शर्मा जी जमींदार घराने के थे और दूर-दराज के राजघरानों के राजपुरोहित, उद्भट विद्वान, भगवत् कथाकार थे। साधना के प्रति उनका झुकाव बचपन में ही दिखने लगा था, जब वे अपने सहपाठियों को, छोटे बच्चों को आमों के बगीचे में बिठाकर स्कूली शिक्षा के साथ-साथ सुसंस्कारिता अपनाने वाली आत्मविद्या का शिक्षण दिया करते थे ।

वह एक बार हिमालय की तरफ भाग निकले और बाद में पकड़े जाने पर उन्होंने कहा कि हिमालय ही उनका घर है और वहीं वे जा रहे थे ।महामना पं.मदनमोहन मालवीय जी ने काशी में आचार्य श्रीराम को गायत्री मंत्र की दीक्षा दी थी। पंद्रह वर्ष की उम्र में वसंत पंचमी की वेला में सन् 1926 में ही लोगों ने उनके भीतर के अवतारी रूप को पहचान लिया था। आचार्य को जाति-पाँति का कोई भेद नहीं था। वह कुष्ठ रोगियों की भी सेवा करते थे। इस महान संत ने नारी शक्ति व बेरोजगार नौजवानों के लिए गाँव में ही एक बुनताघर शुरू किया व अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाया।

इसी महान संत ने ही युग निर्माण के मिशन को गायत्री परिवार, प्रज्ञा अभियान के माध्यम से आगे बढ़ाया। वह कहते थे कि अपने को ज्यादा पवित्र और प्रखर बनाने की तपश्चर्या में जुट जाना- जौ की रोटी व छाछ पर निर्वाह कर आत्मानुशासन सीखना । इसी से वह सार्मथ्य विकसित होगा जो विशुद्धतः परमार्थ प्रयोजनों में नियोजित होगा।

SBI ने अपने ग्राहकों को दी बड़ी खुशखबरी, 1 अक्टूबर लागू हो सकता है नया नियम

पहली बार NDRF में शामिल होंगी महिला कर्मी, बनाई जाएंगी 4 नई बटालियन

तेल की कीमतों में बढ़त को लेकर आरबीआई ने जताई यह आशंका