ईश्वर चंद्र 'विद्यासागर' की जयंती आज, शिक्षा के क्षेत्र में किए थे अद्भुत काम

नई दिल्ली: आज समाज सुधारक, दार्शनिक, लेखक, अनुवादक और शिक्षाशास्त्री ईश्वर चंद्र विद्यासागर की जयंती है। उन्हें बंगाल पुनर्जागरण के स्तंभों में से एक माना जाता है। आज उनकी जयंती के इस मौके पर हम आपको उनके जीवन से संबंधित कुछ ख़ास बातों से रूबरू करवाते है। 

पारित करवाया विधवा पुनर्विवाह कानून :-

देश की महिलाओं को सशक्त बनाने में ईश्वर चंद्र विद्यासागर जी का काफी बड़ा योगदान था। उन्होंने उस दौर में महिलाओं के लिए अधिकार की लड़ाई लड़ी जब महिलाओं का घर से निकलना भी वर्जित होता था। यह उनके प्रयासों का ही फल है जो देश में विधवा पुनर्विवाह कानून  पारित हो पाया था। इतना ही नहीं उन्होंने अपने इकलौते बेटे की शादी भी एक विधवा से कराई थी। 

इस तरह नाम से विद्यासागर नाम;-

ईश्वर चंद्र विद्यासागर का वास्तविक नाम ईश्वर चंद्र वंद्योपाध्याय था, मगर उनकी विद्वता और ज्ञान के भंडार को देखते हुए लोगों ने उन्हें विद्यासागर बुलाना शुरू कर दिया था। धीरे-धीर उनका नाम  ईश्वर चंद्र विद्यासागर ही हो गया। उन्हें विज्ञान से लेकर धर्म तक के कई पहलुओं का गहन ज्ञान था।

 

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"एक मनुष्य का सबसे बड़ा कर्म दूसरों की भलाई और सहयोग होना चाहिए जो एक राष्ट्र का निर्माण करता है।" प्रसिद्ध भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, सामाजिक क्रांति की नींव रखने वाले, स्त्री-शिक्षा व विधवा विवाह के समर्थक, नैतिक मूल्यों के संरक्षक एवं शिक्षाविद् ईश्वर चन्द्र विद्यासागर जी की जयंती पर उन्हें शत् शत् नमन। महिलाओं के उत्थान हेतु उनके द्वारा किए गए कार्य व विचार सदैव युवाओं को प्रेरणा देंगे! #ईश्वरचन्द्र_विद्यासागर - Keshav Prasad Maurya (@kpmaurya1) 26 Sep 2022

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#UPCM @myogiadityanath ने आज जल जीवन मिशन अंतर्गत संचालित हर घर नल योजना के कार्यों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा की। मुख्यमंत्री जी ने परियोजना की महत्ता पर जोर देते हुए जल जीवन मिशन के समयबद्ध क्रियान्वयन और गुणवत्तापरक कार्य के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिए। बैठक में मुख्यमंत्री जी ने जिलाधिकारियों से परियोजना की भौतिक प्रगति का विवरण भी जाना और नियमित समीक्षा के निर्देश दिए। - Chief Minister Office, Uttar Pradesh (@CMOfficeUP) 25 Sep 2022

दया के सागर थे विद्यासागर:-

ईश्वर चंद्र विद्यासागर की दया और करुणा के चर्चे आज भी लोगों के बीच सुने जाते हैं। उन्हें उनके नम्र व्यक्तित्व की वजह से पुरे देश में दया के सागर के नाम से भी जाना जाता था। विद्यासागर हमेशा लोगों की सहायता करते रहते थे।

पिछड़ी जातियों को भी दिलाया सम्मान :-

ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने निचली जाती के लोगों  के लिए भी काफी संघर्ष किया था। उन्होंने समाज में पिछड़ी जातियों के लोगों में शिक्षा का प्रचार-प्रसार करने के लिए काफी प्रयत्न किए थे। उनके प्रयासों और संघर्ष की वजह से ही संस्कृत विश्वविद्यालय में निम्न जातियों के लोगों को पढ़ने की इजाजत मिली थी। 

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