मानवता की मिसाल : रोजा तोड़ आरिफ ने बचाई अजय की जान, कहा- यह मेरा सौभाग्य

देश में आए दिन हिन्दू मुस्लिम के बीच वाद-विवाद देखने को मिलते रहते हैं. लेकिन कभी-कभी मानवता की ऐसी मिसाल भी पेश की जाती हैं, जिसे भुलाया नहीं जा सकता. हाल ही में हिन्दू-मुस्लिम एकता की एक ताजा मिसाल देखने को मिली हैं. जिसमे एक मुस्लिम शख्स आरिफ ने एक हिन्दू शख्स अजय को अपना खून देकर उसकी जान बचाई हैं. यहां तक कि आरिफ ने अपने रोजा की परवाह भी नहीं की. और उनहोने बेझिझक अपना रोजा तोड़ा और अजय की जान बचाई. 

यह ताजा मामला देहरादून का है. यहां आरिफ खान देहरादून के नालापानी चौक सहस्रधारा रोड में रहते हैं. और वे नेशनल एसोसिएशन फॉर पेरेंट्स एंड स्टूडेंट्स (एनएपीएसआर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. आरिफ ने बातचीत में बताया कि हर दिन की तरह शनिवार को सुबह उन्होंने अपना वहाट्सएप चेक किया. जहां उन्हें एक ग्रुप में उत्तरकाशी के चिन्यालीसौड़ निवासी अजय बिजल्वाण के मैक्स अस्पताल के आईसीयू में भर्ती होने की खबर मिली. साथ ही उन्हें पता चला कि अजय की जान बचाने के लिए उन्हें खून की आवश्यकता थी. 

अजय का रक्त समूह भी A पॉज़िटिव निकला. आरिफ ने संदेश पढ़कर अस्पताल से संपर्क साधा. और उन्होंने अजय को खून देने की बात कही. जहां डॉक्टर्स ने उन्हें ख कि खून देने के बाद उन्हें अपना रोजा तोड़ना होगा. रोजा तोड़कर उन्हें नाश्ता करना होगा. इसके बाद आरिफ ने अस्पताल पहुंचकर अजय को खून देकर उनकी जान बचा ली. मानवता के इस कार्य को लेकर आरिफ की हर जगह तारीफें हो रही हैं. 

लोगों का कहना है कि रक्तदान सबसे बड़ा दान होता है. आरिफ ने कहा कि मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म होता हैं. यदि मेरे एक रोजा तोड़ने से एक व्यक्ति की जान बच सकती है तो यह मेरा सौभाग्य है. उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए सबसे बड़ा पुण्य हैं. उन्होंने यह भी माना कि यह सौभाग्य हर किसी को नही मिलता हैं. 

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