"आप" का भोंगा - धक-धक करने लगा जियरा डरने लगा

Mar 14 2015 01:34 AM
चुनांचे भाईयों और बहनों....आपने कभी आॅडियो टेप या ’भोंगे’ का नाम सुना होगा अथवा इन्हें देखने का अवसर आपको मिला होगा....! आॅडियो टेप और भोंगे का जमाना तो फिलहाल बीत गया है लेकिन अभी जिस तरह से ’आप’ के ’भोंगे’ में ’आॅडियो टेप’-’आॅडियो टेप’ सुनाई दे रहा है, उसने बीते जमाने के आॅडियो टेप की आत्मा को खुश कर दिया कि चलो कोई तो निकला जिसने आॅडियो को पुर्नजन्म दिया हो....! ’आप’ में इन दिनों स्टिंग-स्टिंग का खेल चल रहा है, तू भी खेल....मैं भी खेलूं...कांग्रेसी भी खेले, आप नेता भी खेले.....! बापड़े अरविंद केजरीवाल का दिल धक-धक कर रहा होगा....जियरा डरने लगा होगा कि पता नहीं दिल्ली जाते ही...! 

 इलाज कराने के लिये आया था, यहां भी चेन से नहीं बैठने दे रहे.....! अच्छा भला ’आप’ को छोडकर सर्दी खांसी का इलाज कराने आया था, दिल्ली से पैर बाहर रखते ही ’कुत्ता फजीती’ करने लगे.....! अरे क्या ’आप’ को ’लश्कर-ए-तैयबा’ बनाओंगे.....! दिल्ली की जनता से ’जूते’ पड़वाओंगे.....! लगता है कि ’आप’ में भी धीरे-धीरे कांग्रेस भाजपा की ’राजनीतिक खुजली’ का वायरस चिपक गया है....! अब देखना यह है कि अरविंद केजरीवाल इस खुजली का इलाज करते है या फिर ’शिकारी खुद यहां शिकार हो गया.....! 

 पुलिस भी पप्पु के लिये चिंतित

अब इसमें कांग्रेसियों को बुरा लगने वाली क्या बात है....! दिल्ली के पुलिस वालों ने इंडियन पप्पु अर्थात अपने राहुल गांधी के बारे में पूछ क्या लिया तो क्या गुनाह कर दिया....अरे जिस तरह से उनके लिये कांग्रेसी चिंता पाले बैठे है, पुलिस भी चिंतित है कि आखिर वे है कहां....आत्मचिंतन के लिये गये है या फिर हिमालय में किसी साधु संत के डेरे में जाकर बैठ गये.....! मैं-चला-मैं चला....अब तुम्हारे हवाले कांग्रेस साथियो.....! पुलिस चुंकि पुलिस है इसलिये उसका पूछने का अंदाजा भी पुलिसिया ही होता है, इसलिये राहुल का हुलिया पूछ लिया...! इसमें पुलिस की क्या गलती....वे अपने सगे बाप को भी शक की निगाहों से देखते है....तो फिर राहुल की क्या बिसात....! वैसे सम्मानीय कांग्रेसियों, अब राजपाठ आपका नहीं है, इसलिये आपकी सुनेगा कौन....! 

 अभी तो मैं जवां हूं 

अपने शरद यादव जी....! उमर पचास-साठ बरस की हो, परंतु दिल तो जवां है.....! महिलाओं की तारीफ कर दी तो क्या गुनाह किया....उनकी नजर में ’चीज’ ही ऐसी है.....! नख से शिख तक.....! इसलिये माफी मांगने का तो प्रश्न ही नहीं उठता....! वैसे शरद यादव जी ने तारीफ के लिये स्थान को गलत चुना, लिहाजा वे विरोधियों की चपेट में आ गये.....! जिन शब्दों को उन्होंने कहा था, उनके लिये महिलाओं के लिये सम्मान से कम नहीं था.....! जाओं बोल दिया सो बोल दिया, कह दिया सो कह दिया.....! महिलाओँ के सम्मान में इसके पहले भी असम्मानित ढंग से कसीदे कढ़े गये है, परंतु शरद यादव ने अपने शब्दों में कसीदों में अपने ’कड़वे मन, दिल’ के बेरंग चांद सितारें टांक दिये.....! 

इंदौरी भिया तुम्हारे ’जज्बे’ को सलाम है

मध्यप्रदेश के इंदौर की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक परंपरा को चंद इंदौरी युवाओं ने धब्बा लगाने में कोई कोर कसर शेष नहीं रखी....! रंगों का त्योहार खूद के लिये मजेदार बना लिया लेकिन युवतियों के लिये जीवन भर दुःखदायी....! ’इंदौरी भियाओं’ ने जो हरकत की थी, वह इंदौर को शर्मसार कर गई.....! वाह इंदौरी भियाओं....तुम्हारे ’जज्बे’ को सलाम है.....! अरे किसी के कपड़े फाडते यह तो जरा सोचते कि यदि तुम्हारी बहन बेटी के साथ ऐसी कोई हरकत कर देता तो.....! रंग और भंग के नशे में चुर होकर मस्ती छानते तो कोई गम नहीं, गलियों मोहल्लों में हुड़दंग करते तो कोई गुरेज नहीं, लेकिन जिस तरह से तुमने युवतियों के साथ हरकत की, जिसकी निंदा लंबे समय तक समाप्त नहीं हो सकती। रही बात इंदौरी पुलिस की तो क्या कहे....वैसे भी फिल्मों की तरह ओरिजनल पुलिस सब कुछ होने के बाद ही पहुंचती है! 

 और अंत में कांटा लगा.....हाय लगा.... 

 आप-अरविंद जी का जंजाल, और बढ गई शकर, योगेन्द्र, प्रशांत से पिंड छुड़ा नहीं...स्मृति ईरानी....जरा अब संभल जाओं....कार्यकारिणी में नही तो....पद तो कहीं....! हाय लगा कांटा लगा कि नहीं.....!