रिलीज से पहले सुनिए सुपर-30 की असल कहानी, आनंद कुमार की जुबानी

रिलीज से पहले सुनिए सुपर-30 की असल कहानी, आनंद कुमार की जुबानी

देश के मशहूर शिक्षाविद् और 'सुपर 30' कोचिंग संस्थान के संस्थापक आनंद कुमार की बायोपिक जल्द आ रही है और इस पर उनका कहना है कि पटना में वंचित बच्चों को शिक्षित करने का सफर जारी रखने में उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा है और बच्चों को शिक्षित करने में आईं बाधाओं के लिए उन्होंने छोटे शहरों के लोगों की केकड़े वाली मानसिकता को जिम्मेदार बताया है. 

कुमार द्वारा कहा गया है कि, ' जब मुंबई जैसे बड़े शहर की बात आती है तो वहां कई मशहूर हस्तियां रहते हैं जो एकता से रह रहे हैं और कोई व्यक्ति किसी और को नीचे नहीं गिराना चाहता है. हालांकि छोटे शहरों में ऐसा नहीं होआ है और यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण भी है.' उन्होंने कहा कि छोटे शहरों में केकड़े की मानसिकता बसी हुई है और इसलिए कई प्रभावशाली लोग किसी भी ऐसे व्यक्ति को प्रताड़ित करने लगते हैं और उसे नीचे गिराने में वे लग जाते हैं जो कुलीन या विशेष समाज से नहीं आता हो और उन्होंने आईपीएस अधिकारी और शिक्षाविद् अभयानंद के साथ साल 2002 में इस उद्देश्य के साथ 'सुपर 30' कार्यक्रम की स्थापना की थी. आज देशभर में यह संस्थान काफी प्रचलित है.

ख़ास बात यह है कि कुमार किसी व्यक्ति या संस्था से कोई आर्थिक सहायता नहीं लेते है और इस शिक्षा कार्यक्रम के लिए सारा धन वे खुद ही मुहैया कराते हैं. कुमार देवारा हल ही में कहा गया है कि, 'जबसे मैंने 'सुपर 30' शुरू किया है, तबसे मेरी मंशा उन योग्य छात्रों को उनका सपना पूरा करने का मौका दिलाना रहा है और कोशिश रही कि खराब आर्थिक स्थिति के कारण उन्हें कभी परेशानी नहीं होनी चाहिए.' आपको जनकरे के लिए बता दें कि उनकी जीवन पर बनी फिल्म सुपर-30 में ऋतिक अहम रोल में हैं. फिल्म 12 जुलाई को रिलीज की जाएगी. 

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