इलाहाबाद HC का ऐतिहासिक फैसला, विवाहित होकर भी लिव-इन में रहना अपराध, पुरुष होगा दोषी

By Bhavesh Bakshi
Jan 20 2021 12:14 PM
इलाहाबाद HC का ऐतिहासिक फैसला, विवाहित होकर भी लिव-इन में रहना अपराध, पुरुष होगा दोषी

प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लिव इन रिलेशनशिप पर एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि विवाहित होते हुए गैर पुरुष के साथ पति-पत्नी की तरह रहना लिव इन रिलेशन नहीं है, बल्कि यह जुर्म की श्रेणी में आता है. यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केशरवानी व न्यायमूर्ति डॉ. वाईके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने हाथरस जिले के ससनी थाना क्षेत्र की रहने वाली आशा देवी व अरविंद की याचिका को खारिज करते हुए दिया है.

बता दें कि याची आशा देवी की शादी महेश चंद्र के साथ हुई है. दोनों के बीच तलाक नहीं हुआ है. किन्तु, याची अपने पति से अलग दूसरे पुरुष अरविन्द के साथ पति-पत्नी के जैसे रहती है. अदालत ने कहा कि यह लिव इन रिलेशनशिप नहीं है, वरन दुराचार का जुर्म है, जिसके लिए पुरुष अपराधी है. याची का कहना था कि वह दोनों लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं. उन्हें उनके परिजनों से सुरक्षा प्रदान की जाए. वहीं अदालत ने यह भी कहा कि विवाहित महिला के साथ धर्म परिवर्तन कर लिव इन रिलेशनशिप में रहना भी जुर्म है. अवैध संबंध बनाने वाला पुरुष अपराधी है. 

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि परमादेश कानूनी अधिकारों को लागू करने या संरक्षण देने के लिए जारी किया जा सकता है, किसी अपराधी को संरक्षण देने के लिए नहीं. अगर अपराधी को सुरक्षा देने का आदेश दिया गया, तो यह जुर्म को संरक्षण देना होगा. कानून के खिलाफ अदालत अपनी अंतर्निहित शक्तियों का इस्तेमाल नहीं कर सकता. जो पुरुष किसी विवाहित महिला के साथ लिव रिलेशन में रह रहा है, वह भारतीय दंड संहिता के 494 (पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करना) और 495 (पहले से किए गए विवाह को छिपाकर दूसरा विवाह करना) के तहत दोषी पाया जाएगा. इसी तरह से धर्म परिवर्तन करके शादीशुदा के साथ रहना भी अपराध है.

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