धर्म पर सियासत: भाजपा के राम के बाद अब अखिलेश ने अपनाए कृष्ण

धर्म पर सियासत: भाजपा के राम के बाद अब अखिलेश ने अपनाए कृष्ण

इंदौर: विधानसभा और लोकसभा चुनाव में अब कुछ ही समय बाकि रह गया है, इसके साथ ही राजनितिक पार्टियों ने आवाम को रिझाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं और जैसा कि हर बार होता है, राजनेता धर्म-जाति ईश्वर के नाम पर लोगों को वोट बैंक में तब्दील करने की कोशिश कर रहे हैं. भगवान श्री राम पर तो भाजपा और आरएसएस ने कॉपीराइट कर रखा है. राम मंदिर का ही मुद्दा उछाल कर भाजपा ने सत्ता पर कब्ज़ा किया था, उसके बाद कांग्रेस व् अन्य पार्टियां भी समझ गई है कि इस देश में लोग विकास या उन्नति के नाम पर नहीं, बल्कि भगवान के नाम पर वोट देते हैं. इसलिए पिछले कुछ समय में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी भी मंदिर-मंदिर माथा टेकते नज़र आ रहे हैं, वर्तमान में भी वे कैलाश मानसरोवर यात्रा पर हैं. अब जब महागठबंधन के सरगना को ये राज़ पता चल गया है, तो उनकी साथी पार्टियां कैसे पीछे रह सकती थी.

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इसी क्रम में अब अखिलेश यादव भी मध्य प्रदेश में पैर ज़माने के लिए श्री कृष्ण के नाम का सहारा लेने की योजना बना रहे हैं, हिन्दू धर्म के सभी लोग अच्छी तरह जानते हैं कि श्री कृष्ण यादव कुल के थे, हालाँकि उनका अखिलेश या मुलायम से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था, लेकिन यादव वंश के लोग अब भी खुद को श्री कृष्ण का वंश मानते हैं. इसी बात का फायदा उठाकर अखिलेश इस जन्माष्टमी पर मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में यादवों को वोट बैंक में परिवर्तित करने का प्रयास करेंगे. भगवान श्री कृष्ण के नाम का सहारा लेकर अखिलेश इस चुनावी महाभारत में भाजपा और कांग्रेस के बाद तीसरी ताक़त बनना चाहते हैं.

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दरअसल, पिछले 15 सालों में समाजवादी पार्टी मध्य प्रदेश में कोई जनाधार नहीं बना पाई है, इसीलिए अब वे अपने पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में पार्टी को मजबूत करना चाहती है. मध्यप्रदेश में समाजवादी पार्टी के पास सिर्फ यादव जाति के ही वोटर हैं. पार्टी इन्हीं वोटरों के सहारे विधानसभा अथवा लोकसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारती रहती है. पिछड़े वर्ग की अन्य जातियों के साथ भी कोई तालमेल समाजवादी पार्टी नहीं बैठा पाती है. मुस्लिम वोटर जरूर उसकी प्राथमिकता में रहते हैं. समाजवादी पार्टी का कोई मजबूत संगठन भी राज्य में नहीं है.

मध्य प्रदेश में बदहाल रही है सपा 

वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में सपा ने कुल 161 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे, इनमें 146 की जमानत जब्त हो गई थी. पार्टी को 5.26 प्रतिशत वोट मिले थे. वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में उसका वोट शेयर घटकर 2.46 प्रतिशत रह गया. मात्र एक सीट ही पार्टी जीत सकी. 183 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी कोई सीट नहीं जीत पाई थी. उसके 164 में से कुल तीन उम्मीदवार अपनी जमानत बचा पाए थे, उसका वोट शेयर 1.70 प्रतिशत बचा. ऐसे हालातों को देखते हुए अखिलेश ने अब श्री कृष्ण को याद किया है, देखते हैं श्री कृष्ण के नाम पर वे कितने यादवों का भरोसा हासिल करने में कामयाब रहते हैं. 

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