यूपी चुनाव: अखिलेश-चंद्रशेखर साथ आकर बढ़ा देंगे मायावती की मुसीबत, टूटेगा दलित वोट बैंक

लखनऊ: बीते दिनों आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद रावण ने समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाक़ात की। अखिलेश यादव के साथ मुलाक़ात के बाद दोनों दलों के बीच गठबंधन होने की अटकलें शुरू हो गई हैं। हालांकि चंद्रशेखर रावण ने सपष्ट कर दिया है कि वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने के लिए किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि जब तक गठबंधन को लेकर कुछ भी निर्धारित नहीं हो जाता है, तब तक कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी।

भाजपा को रोकने के लिए आजाद समाज पार्टी और सपा के बीच होने वाले संभावित गठबंधन से सबसे अधिक नुकसान बसपा सुप्रीमो मायावती को हो सकता है। दरअसल, यूपी में लगभग 22 फीसद दलित आबादी है, ये समुदाय पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर सीधा अपना असर डालते हैं। यही नहीं यूपी की कुल 403 विधानसभा सीटों में से 85 सीटें दलितों के लिए आरक्षित हैं। इसी वजह से इन सीटों पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का मजबूत जनाधार है, किन्तु पिछले दो चुनावों में यहां भी मायावती को नुकसान झेलना पड़ा है।

ऐसे में यदि दलित समुदाय से ही आने वाले चंद्रशेखर रावण, सपा के साथ गठबंधन करेंगे तो इन सीटों पर भी बसपा को भारी नुकसान हो सकता है। दलित वोट बैंक के ऊपर दोनों नेताओं की काफी पकड़ है। बीते कुछ वर्षों में चंद्रशेखर रावण युवा चेहरे व बड़े दलित नेता के रूप में उभरकर सामने आए हैं। इसलिए कभी बसपा का अपना वोट बैंक रहा दलित समुदाय का एक बड़ा हिस्सा चंद्रशेखर रावण की पाले में जा सकता है। जिसका नुकसान बसपा को झेलना पड़ सकता है।

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