धर्म का कारोबार चलाने वाले बाबाओं पर अखाड़ा परिषद की नज़रें होंगी टेढ़ी

इलाहाबाद। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख और कथित संत गुरमीत राम रहीम को सजा सुनाए जाने और उनके जेल जाने के बाद अब अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद सक्रिय हो गया है। अब तक हिंदू धार्मिक बाबाओं को लेकर अखाड़ा परिषद अधिक सख्त नहीं था मगर अब लगता है कि परिषद इस मामले में तल्ख हो गया है। अखाड़ा परिषद ने इस हेतु एक बैठक इलाहाबाद के मठ बाघंबरी गद्दी में एक बैठक आयोजित की।

अखाड़ा परिषद फर्जी धर्मगुरूओं की सूची तैयार करने में लगा है। मिली जानकारी के अनुसार आस्था के नाम पर इन बाबाओं ने काफी आर्थिक लाभ उठाया है और ये एक तरह से धर्म का आडंबर फैलाकर रूपए कमा रहे हैं ऐसे में इन बाबाओं को सामूहिक तौर पर बहिष्कृत किया जाएगा। अखाड़ा परिषद स्वयंभू बाबाओं को लेकर परेशान है।

ऐसे में ऐसे बाबाओं या धर्मगुरूओं की सूची तैयार की जाएगी जो कि सनातन धर्म की साख खराब करने में लगे हैं। इन बाबाओं को अर्द्धकुंभ में सरकारी सुविधाऐं नहीं मिलेगी। जिन बाबाओं के नाम इस सूची में है उनमें राधे माॅं, स्वामी भीमानन्द, बाबा ओमानन्द, निर्मल बाबा, स्वामी रामपाल, गुरमीत राम रहीम, स्वामी अच्युतानंद आदि के नाम शामिल हैं।

कई बाबा ऐसे हैं जिन पर कई आरोप लगे हैं। हालांकि कुछ ऐसे भी बाबा हैं जिन्हें अखाड़ा परिषद ने मान्यता दी है और ये आज के दौर में प्रमुख संत महात्मा हैं। कुछ तो महामंडलेश्वर तक बन जाते हैं हालांकि जानकारी लगने पर इनका पद समाप्त किया गया है। ऐसे कुछ महामंडलेश्वर पहले अखाड़ा परिषद की नज़र में आए और उन पर कार्रवाई की गई लेकिन कथित तौर पर कहा जाता रहा है कि कुछ बाबा ऐसे भी हैं जो बेहद प्रभावशाली हैं और उन्हें अखाड़ा परिषद ने मान्यता दे रखी है जबकि उन्होंने भी धर्म को कथित रूप से कारोबारी तरह से फैला रखा है। 

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